बधाई..बधाई…बधाई…सभी गुरुभक्तो के शुभ संकल्प और साधना से वो मंगल घड़ी आख़िरकार आ ही गई ..जिसकी सभी को काफी लम्बे समय से प्रतीक्षा थी.गुजरात उच्च न्यायालय ने पूज्य साईं जी को पूजनीय माताजी की सेवा के लिए २६ मई २१ ..दिनों की अंतरिम जमानत प्रदान करने की सम्भावना है | हम सभी गुरुभक्त मान. न्यायालय का आत्मीय आभार व्यक्त करते है और विश्वास दिलाते है की जो भी दिशा निर्देश इस अवधि के लिए दिए गए है,उनका अक्षरशः पालन किया जायेगा ताकि पूज्य साईं जी को कोई परेशानी नहीं हो.इस मंगल घडी के संकेत पूज्य साईं जी ने इस माह के विश्वगुरु ओजस्वी मई माह के अंक केपेज ३ पर पहले ही दे दिए थे.मान.कोर्ट से राहत का इंतजार कर रहे साधको को उन्होंने हिम्मत बंधाते हुए कहा था….
” ख्वाब पूरे भी तभी होते है,जब होता है आप में भरपूर आत्मविश्वास और हर चुनोतियों से जूझने का जज्बा ! हमारा हौसला बुलंद रहे उन ख्वाबों को पूरा करने के लिए…!बड़े ख्वाबों को देखकर निराश हताश मत बनो ! आलोचनाओ की परवाह मत करो ! कोशिश करते रहो ..पूरा प्रयास करो…धीरज के साथ …सम्पूर्ण ताकत लगा दो उन अरमानों को पूरा करने के लिए..और आप देखोगे…अवश्य आपकी मेहनत रंग लाएगी..सफलता मिलेगी….खुली आँखों वे सपने हकीक़त बनने लगेंगे..आप एक दिन अवश्य सफल होंगे.”
हमारा धर्म…गुरु आज्ञा का पालन…
जैसा पूज्य साईं जी ने पहले ही आदेशित किया है कि आज मेरी वयोवृद्ध और रोग-पीड़ित पूजनीया मातुश्री को मेरी सेवा की अत्यधिक आवश्यकता है और ऐसे में मैं तन-मन-धन से उनकी सेवा कर उन्हें पूर्ण स्वस्थ देखना चाहता हूँ जो कि हरेक पुत्र का प्रथम कर्तव्य है| मेरे बाहर आने के इन २१ दिनों के दौरान मेरे निवास पर किसी प्रकार की भीड़ इकठ्ठी न हो – प्रसाद लेना – देना न हो – मुझसे मिलने – का आग्रह न हो – और ना ही मुझे देखने का आग्रह हो । हकीकत में मैं आप मेरी अंतरात्मा हैं और मैं आपकी अंतर आत्मा बनकर प्रतिष्ठित हूँ | आपके शुभसंकल्प और सहयोग से मैं इस दायित्व को सफलतापूर्वक निभाऊंगा ऐसा विश्वास है । अतः अपनी श्रद्धा व प्रेम को प्रदर्शित किये बिना, उसे अंतर मन की भूमि में बीज रूप में और अंदर दबा देना – और अनुकूल वक्त का इंतजार करना ! बेशक – वह समय भी आएगा – जब आपको उत्सव मनाने – जय – जयकार करने की छूट मिलेगी – परन्तु अभी आत्म – अनुशासनात्मक व्यवहार का ही आप परिचय देने में सफल होने का भरसक प्रयत्न करेंगे और अपने इस आचरण, व्यवहार से हम सभी माननीय सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए – कानून व्यवस्था को बनाये रखने में सहयोग करते हुए – अपने नागरिकत्व को सफल बनाएं| न्यायालय का सम्मान करें ! सभी शर्तों को पालने में सफल बनें ! लम्बे समय से रोगग्रस्त मेरी वृद्ध माँ के शीघ्रातिशीघ्र उपचार का अति आवश्यक व महत्वपूर्ण कार्य मैं इस लघुकाल में अबाधित रूप से कर पाऊं इसी प्रार्थना के साथ…..”
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