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तीसरा विश्व युद्ध

Word War 3 & India

Mankind created nuclear weapons & biological weapons only to destroy themselves.
#WorldWar3Movie 👉🏻gives us guidelines to save ourselves from destructions.
The deadly technology residing in the hands of EGOISTIC & POWER-THIRSTY nations is going to end this planet!
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एकादशी

Mohini Ekadashi


 mohini_ekadashi
Mohini Ekadashi Significance (मोहिनी एकादशी माहात्म्य) | 26th April 2018 | Sant Shri Asaram ji Bapu
Mohini Ekadashi Vrat Katha in Hindi. Mohini Ekadashi Story.It is believed that whosoever observes a complete fast on this sacred day gets great benefits.
mohini ekadashi vrat katha. Read religion-festivals news in Hindi. Stay tuned for mohini, ekadashi, vishnu news and other Hindi News at http://www.ashram.org
This page provides you the most shubh, auspicious time for Mohini Ekadashi Vrat, fasting date and Parana time in year 2017 for Ahmedabad, Ujjain, Madhya Pradesh, India.
Mohini Ekadasi Sri Yudhisthira Maharaja said, Oh Janardana, what is the name of the Ekadasi that occurs during the light fortnight (sukla paksha) of the mont…
The Ekadashi day is recognized as the best of all days to fast because it is on this … Mohini …
May 6, 2017 – Mohini Ekadashi occurs during the waxing phase of moon in the month of Vaisakha. The greatness of this Ekadasi was explained …

मोहिनी एकादशी

युधिष्ठिर ने पूछा: जनार्दन जनार्दन ! वैशाख मास के शुक्लपक्ष में किस नाम की एकादशी होती है? उसका क्या फल होता है? उसके लिए कौन सी विधि है?

भगवान श्रीकृष्ण बोले: धर्मराज ! पूर्वकाल में परम बुद्धिमान श्रीरामचन्द्रजी ने महर्षि वशिष्ठजी से यही बात पूछी थी, जिसे आज तुम मुझसे पूछ रहे हो ।

श्रीराम ने कहा: भगवन् ! जो समस्त पापों का क्षय तथा सब प्रकार के दु:खों का निवारण करनेवाला, व्रतों में उत्तम व्रत हो, उसे मैं सुनना चाहता हूँ ।

वशिष्ठजी बोले: श्रीराम ! तुमने बहुत उत्तम बात पूछी है । मनुष्य तुम्हारा नाम लेने से ही सब पापों से शुद्ध हो जाता है । तथापि लोगों के हित की इच्छा से मैं पवित्रों में पवित्र उत्तम व्रत का वर्णन करुँगा । वैशाख मास के शुक्लपक्ष में जो एकादशी होती है, उसका नाम ‘मोहिनी’ है । वह सब पापों को हरनेवाली और उत्तम है । उसके व्रत के प्रभाव से मनुष्य मोहजाल तथा पातक समूह से छुटकारा पा जाते हैं । सरस्वती नदी के रमणीय तट पर भद्रावती नाम की सुन्दर नगरी है । वहाँ धृतिमान नामक राजा, जो चन्द्रवंश में उत्पन्न और सत्यप्रतिज्ञ थे, राज्य करते थे । उसी नगर में एक वैश्य रहता था, जो धन धान्य से परिपूर्ण और समृद्धशाली था । उसका नाम था धनपाल । वह सदा पुण्यकर्म में ही लगा रहता था । दूसरों के लिए पौसला (प्याऊ), कुआँ, मठ, बगीचा, पोखरा और घर बनवाया करता था । भगवान विष्णु की भक्ति में उसका हार्दिक अनुराग था । वह सदा शान्त रहता था । उसके पाँच पुत्र थे : सुमना, धुतिमान, मेघावी, सुकृत तथा धृष्टबुद्धि । धृष्टबुद्धि पाँचवाँ था । वह सदा बड़े-बड़े पापों में ही संलग्न रहता था । जुए आदि दुर्व्यसनों में उसकी बड़ी आसक्ति थी । वह वेश्याओं से मिलने के लिए लालायित रहता था । उसकी बुद्धि न तो देवताओं के पूजन में लगती थी और न पितरों तथा ब्राह्मणों के सत्कार में । वह दुष्टात्मा अन्याय के मार्ग पर चलकर पिता का धन बरबाद किया करता था। एक दिन वह वेश्या के गले में बाँह डाले चौराहे पर घूमता देखा गया । तब पिता ने उसे घर से निकाल दिया तथा बन्धु बान्धवों ने भी उसका परित्याग कर दिया । अब वह दिन रात दु:ख और शोक में डूबा तथा कष्ट पर कष्ट उठाता हुआ इधर उधर भटकने लगा । एक दिन किसी पुण्य के उदय होने से वह महर्षि कौण्डिन्य के आश्रम पर जा पहुँचा । वैशाख का महीना था । तपोधन कौण्डिन्य गंगाजी में स्नान करके आये थे । धृष्टबुद्धि शोक के भार से पीड़ित हो मुनिवर कौण्डिन्य के पास गया और हाथ जोड़ सामने खड़ा होकर बोला : ‘ब्रह्मन् ! द्विजश्रेष्ठ ! मुझ पर दया करके कोई ऐसा व्रत बताइये, जिसके पुण्य के प्रभाव से मेरी मुक्ति हो ।’

कौण्डिन्य बोले: वैशाख के शुक्लपक्ष में ‘मोहिनी’ नाम से प्रसिद्ध एकादशी का व्रत करो । ‘मोहिनी’ को उपवास करने पर प्राणियों के अनेक जन्मों के किये हुए मेरु पर्वत जैसे महापाप भी नष्ट हो जाते हैं |’

वशिष्ठजी कहते है: श्रीरामचन्द्रजी ! मुनि का यह वचन सुनकर धृष्टबुद्धि का चित्त प्रसन्न हो गया । उसने कौण्डिन्य के उपदेश से विधिपूर्वक ‘मोहिनी एकादशी’ का व्रत किया । नृपश्रेष्ठ ! इस व्रत के करने से वह निष्पाप हो गया और दिव्य देह धारण कर गरुड़ पर आरुढ़ हो सब प्रकार के उपद्रवों से रहित श्रीविष्णुधाम को चला गया । इस प्रकार यह ‘मोहिनी’ का व्रत बहुत उत्तम है । इसके पढ़ने और सुनने से सहस्र गौदान का फल मिलता है ।’

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Tithi

Somvati Amavasya


somvati_amavasya

Somvati Amavasya Details

(Vrindavan Satsang)

Pujya Bapuji said that doing japa and meditation (dhyan) on Somvati Amavasya is lakh times more beneficial as compared to doing the same on any other day. He further mentioned that performing japa and meditation on SomvatiAmavasya would afford the same high religious merits as doing them on the supremely holy nights of Diwali, Holi, Shivratri, Janmashtami or during an eclipse. . . . . .

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Tithi

Spiritual Importance Of Akshaya Tritiya


अक्षय तृतीया

Akshaya Tritiya (18TH APRIL 2018) is one of the most significant days, both, according to the Hindu calendar and mythology. Calendar wise (traditional Hindu), it falls on the third day of the bright half of Vaishakha (late April – early May), when the sun and the moon are in exalted positions and at the peak of their brightness. Such a phenomenon happens only once a year and is astrologically considered the perfect time to start any meaningful endeavor. And per various mythological legends that are linked to the day, it proved to be nothing but fruitful to many: sacred river Ganga descended onto the earth from heaven, Lord Parashurama, the sixth incarnation of Lord Shiva being born, Pandavas getting unlimited supply of food from the Akshaya Patra, and Sudama getting blessed by Lord Krishna more than he could have asked for; all happened on this day.Even according to the Sanskrit meaning of the word Akshaya: imperishable or never diminishing, the fruits that are borne on this day, keep on multiplying. It’s precisely because of this reason and another, according to which the day is ruled by the Preserver God Vishnu, that any venture: be it a business or any personal quest for self improvement; gets fulfilled positively. Lord Vishnu sees the intention and preserves what has been started, in the long run. On this day, people buy and wear gold: an ultimate symbol of wealth and prosperity, which is believed to invite the Goddess of wealth, Laxmi, into the households. It’s even considered an auspicious time to make long term purchases in the form of gold or silver, real estate, diamonds and other precious stones, and shares and bonds.

Doing charity is one of the important aspects of Akshaya Tritiya and it’s believed that specific items donated on this day like land, gold, umbrellas, hand fans, cool refreshing drinks and activities like feeding the poor, feeding the cow and calf, bring in blessings from the above. Blessing the money or the material, mentioned above or any other, to be given out on this day multiplies many times over. Another significant aspect of this is the worship of Goddess Laxmi with gold coins and other items kept in the Puja (ritualistic worship) makes the wealth accumulate all through the year. Also, bathing in the holy rivers, especially Ganga and Yamuna, charity in the form of giving out rice, wheat, ghee, salt, fruits, vegetables, tamarind, and clothes and remembering the departed ancestors is believed to do much good to the devotees. Irrespective of what section of the society does one belong to, the festival of Akshaya Tritiya is celebrated in all the parts of the country.

 

 

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एकादशी

वरुथिनी एकादशी


varuthani-ekadashi

varuthani-ekadashi

युधिष्ठिर ने पूछा : हे वासुदेव ! वैशाख मास के कृष्णपक्ष में किस नाम की एकादशी होती है? कृपया उसकी महिमा बताइये।

 

भगवान श्रीकृष्ण बोले: राजन् ! वैशाख (गुजरात महाराष्ट्र के अनुसार चैत्र ) कृष्णपक्ष की एकादशी ‘वरुथिनी’ के नाम से प्रसिद्ध है । यह इस लोक और परलोक में भी सौभाग्य प्रदान करनेवाली है । ‘वरुथिनी’ के व्रत से सदा सुख की प्राप्ति और पाप की हानि होती है । ‘वरुथिनी’ के व्रत से ही मान्धाता तथा धुन्धुमार आदि अन्य अनेक राजा स्वर्गलोक को प्राप्त हुए हैं । जो फल दस हजार वर्षों तक तपस्या करने के बाद मनुष्य को प्राप्त होता है, वही फल इस ‘वरुथिनी एकादशी’ का व्रत रखनेमात्र से प्राप्त हो जाता है ।

 

नृपश्रेष्ठ ! घोड़े के दान से हाथी का दान श्रेष्ठ है । भूमिदान उससे भी बड़ा है । भूमिदान से भी अधिक महत्त्व तिलदान का है । तिलदान से बढ़कर स्वर्णदान और स्वर्णदान से बढ़कर अन्नदान है, क्योंकि देवता, पितर तथा मनुष्यों को अन्न से ही तृप्ति होती है । विद्वान पुरुषों ने कन्यादान को भी इस दान के ही समान बताया है । कन्यादान के तुल्य ही गाय का दान है, यह साक्षात् भगवान का कथन है । इन सब दानों से भी बड़ा विद्यादान है । मनुष्य ‘वरुथिनी एकादशी’ का व्रत करके विद्यादान का भी फल प्राप्त कर लेता है । जो लोग पाप से मोहित होकर कन्या के धन से जीविका चलाते हैं, वे पुण्य का क्षय होने पर यातनामक नरक में जाते हैं । अत: सर्वथा प्रयत्न करके कन्या के धन से बचना चाहिए उसे अपने काम में नहीं लाना चाहिए । जो अपनी शक्ति के अनुसार अपनी कन्या को आभूषणों से विभूषित करके पवित्र भाव से कन्या का दान करता है, उसके पुण्य की संख्या बताने में चित्रगुप्त भी असमर्थ हैं । ‘वरुथिनी एकादशी’ करके भी मनुष्य उसीके समान फल प्राप्त करता है ।

 

राजन् ! रात को जागरण करके जो भगवान मधुसूदन का पूजन करते हैं, वे सब पापों से मुक्त हो परम गति को प्राप्त होते हैं । अत: पापभीरु मनुष्यों को पूर्ण प्रयत्न करके इस एकादशी का व्रत करना चाहिए । यमराज से डरनेवाला मनुष्य अवश्य ‘वरुथिनी एकादशी’ का व्रत करे । राजन् ! इसके पढ़ने और सुनने से सहस्र गौदान का फल मिलता है और मनुष्य सब पापों से मुक्त होकर विष्णुलोक में प्रतिष्ठित होता है ।

 

(सुयोग्य पाठक इसको पढ़ें, सुनें और गौदान का पुण्यलाभ प्राप्त करें ।)

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Akshaya Tritiya : Golden Day To Enhance Spiritual Journey


akshay tritiya

Akshaya Tritiya

The Holy hindu scriptures tells us the religious Importance of akshaya tritiya (18th April 2018) which falls on the third day of the bright half of Vaishakh month.If an aspirant do japa,dhyna or perform any other spiritual activity on this day which gives infinite benefit.Hindus believes in the mythology of muhurats and akshaya tritiya is one such momentous occasion, which is considered one of the most auspicious days of the Hindu Calendar. It is believed, any meaningful activity started on this day would be fruitful. . Initiations made or valuables bought on this day are considered to bring success or good fortune. Buying gold is a popular activity on Akshaya Tritiya, as it is the ultimate symbol of wealth and prosperity.Gold and gold jewelry bought and worn on this day signify never diminishing good fortune. Indians celebrate weddings, begin new business ventures, and even plan long journeys on this day.

Early morning bathe,worship and veneration ;if any aspirant take bath in the holy Ganges,which gives fruit of all the pilgrimage.Hindu scriptures also tells the importance of chanting, verbal silence,charity, offer barley in a sacred fire and worship Lord Ganesha & Devi Lakshmi on this day and also the importance Of parent Libation On Akshaya Tritiya.

Spiritual & Highest Message of Akshaya Tritiya

“Akshya” means imperishable- that which never diminishes. Materialistic world and body are perishable but eternal is only God. Akshaya tritiya reminds us to know the real nature of materialistic world or liberate oneself from the bondage of all the sufferings.The Day teaches us to have deep and rigid faith in our religion,great spiritual gurus, ones deeds which helps us to attain salvation.

 

 

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