
नारायण साँर्इं कहीं भाग नहीं रहे थे, उन्होंने पहले ही सूरत के समाचार पत्रों में छपवा दिया था कि ‘‘मैं कहीं भी भागा नहीं हूँ । उचित समय पर सामने भी आ जाऊँगा । मुझ पर लगे सारे आरोप झूठे और बेबुनियाद हैं । कानून के अनुसार हमने न्यायालय का आश्रय लिया है । न्यायप्रणाली पर हमें पूरा विश्वास है और न्यायिक प्रक्रिया के पूरा होने का इंतजार है । संविधान के तहत हर नागरिक अपने-आप पर लगे झूठे आरोपों से बचाव के लिए अग्रिम जमानत की अर्जी दे सकता है ।’’
नारायण साँर्इं देश की कानून-व्यवस्था का सहारा लेकर दुष्टों के षड़यंत्र से अपनी व अन्य निर्दोषों की रक्षा करने में लगे थे । अतः उनके खिलाफ अनर्गल भ्रामक प्रचार करना सर्वथा अनुचित है ।
नारायण साँर्इं के आश्रमवासियों को मिल रही धमकियों पर नजर डालें तो षड़यंत्रकारियों के मंसूबे बहुत ही नापाक हैं। उन्होंने अपनी धमकियों में यहाँ तक कह दिया है कि ‘हम नारायण साँर्इं को जिंदा नहीं छोड़ेंगे, जान से मार देंगे । हमारी पहुँच बहुत दूर तक है । अब तक हमारी ताकत का अंदाजा तो तुम लोगों को आ ही चुका होगा ।’
नारायण साँर्इं के जयपुर स्थित साहित्य-केन्द्र पर हुआ आतंकी हमला और निवासियों को दी गयी धमकी तथा तदनुसार दर्ज की गयी एफआईआर एवं पुलिस आयुक्त को सौंपी शिकायत इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हैं ।
जानकारों के अनुसार ऐसे में नारायण साँर्इं का प्रत्यक्ष रूप से सामने आना प्राणघातक हो सकता था । किसी भी माध्यम से जैसे खान-पान, चिकित्सा आदि के बहाने उनकी जान को खतरा होने से न्यायालय का फैसला आने तक अप्रकट रूप से कानूनी लड़ाई लड़ना ही सभी दृष्टियों से हितकर था । क्योंकि पूज्य संत आशारामजी बापू, नारायण साँर्इं और आश्रम के खिलाफ कई वर्षों से षड्यंत्र चल रहे हैं और ऐसे में कानूनी प्रक्रिया जब तक चल रही है, तब तक अपना बचाव करना उनका संवैधानिक अधिकार है । गुजरात उच्च न्यायालय ने गुजरात पुलिस और सूरत के सत्र न्यायालय को गलत ठहराते हुए नारायण साँर्इं के खिलाफ गैर-जमानती वॉरंट को रद्द कर दिया और साथ ही घोषित किया कि नारायण साँर्इं शुरुवात से लेकर आखिरी तक भगौड़े थे ही नहीं, उनको भगौड़ा कहना बिल्कुल गलत था ।
इससे पहले इस संदर्भ में गुजरात उच्च न्यायालय ने गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया था और ‘नारायण साँर्इं के खिलाफ अरेस्ट वॉरंट क्यों निकाला ?’ इसका जवाब माँगा था । साँर्इं के वकील ने कहा था कि ‘नारायण साँर्इं अपने संवैधानिक अधिकार का उपयोग कर रहे थे । उन्हें गिरफ्तारी देने का कोई सवाल ही नहीं उठता । उच्च न्यायालय में उनकी जमानत अर्जी लगी हुई थी, जिसका कोई निर्णय नहीं आया था । ऐसी स्थिति में वॉरंट जारी करना नारायण साँर्इं को अग्रिम जमानत के अधिकार से वंचित रखने के समान था । सूरत पुलिस केवल गिरफ्तारी को लेकर नारायण साँर्इं के पीछे पड़ी थी।’
मीडिया द्वारा लोगों को भ्रमित कर पूज्य संत आशारामजी बापू तथा उनके परिवार के विरुद्ध एक माहौल पैदा किया जा रहा है । इसका जागरूक जनता को विरोध करना चाहिए तथा सही जानकारी जनमानस तक पहुँचाकर देशहितकारी कार्य करना चाहिए ।
मैंने संत श्री आशारामजी बापू के केस का पूरी तरह से अध्ययन किया है और कुछ डॉक्टरों से भी परामर्श लिया जो इस तरह की मेडिकल रिपोर्ट बनाते हैं । उन्होंने कहा : ‘‘बहेंनजी ! मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर हम १०० प्रतिशत, निश्चित रूप से कह सकते हैं कि न रेप है और न ही रेप की कोशिश की गयी है और यौन उत्पीड़न का भी केस नहीं है क्योंकि किसी भी नाबालिग की त्वचा बहुत ही मुलायम होती है और अगर कोई उत्पीड़न होता तो उसके निशान रहते ।
कोई महिला आती है और वह कहती है तो आप उस पर विश्वास करोगे या फिर उन महापुरुष पर जिन्होने अपना पूरा जीवन विश्व-कल्याण के लिए लगा दिया ? वे बोल रहे हैं २००२ में घटना घटी । ११-१२ वर्ष तक किसी भी महिला का चुप रहना असम्भव है । अब २०१३ चल रहा है, ११-१२ साल के बाद वे आते हैं और झूठा मामला दर्ज कराते हैं ! वे सब स्पष्ट रूप से जानते हैं कि उनका केस न्यायालय में नहीं टिक पायेगा ।
स्वामी नित्यानंदजी के बारे में भी खूब दुष्प्रचार किया गया परंतु उनके बारे में दिखायी गयी सेक्स सीडी फर्जी निकली ।
संत श्री आशारामजी बापू पर किया गया केस झूठा है, लड़की को कुछ नहीं हुआ । यह असम्भव है कि उस कमरे में लड़की को कुछ हुआ हो । जैसा कि लड़की दावा कर रही है, जब उस रात ३ लड़के कमरे के बाहर बैठे थे और लड़की की माँ भी बैठी थी, उसी समय डेढ़ घंटे तक घटना घटी और माँ साथ थी, आयी थी देखने के लिए कि क्या हो रहा है और उसने कुछ नहीं सुना ! यह कैसे सम्भव है ?
लड़की कमरे के बाहर आयी और माँ से मिली । दोनों साथ गयीं और लड़की के पिता से मिलीं । सभी फार्म के मालिक से मिले, उनके साथ रात को खाना खाया, सारी रात वे वहीं रुके । सुबह उनके साथ नाश्ता किया । फिर फार्म के मालिक ने स्टेशन छोड़ने हेतु कार की व्यवस्था की और तब तक किसीसे कोई भी शिकायत नहीं की गयी।
अब देश की जागरूक जनता इस षड्यंत्र को समझे और विचार करे कि संत आशारामजी बापू और उनके सेवादारों को आखिर क्यों सताया जा रहा है ? क्या उनका यही गुनाह है कि उन्होंने देश, संस्कृति व समाज को नोचने व तोड़ने वाली ताकतों से देशवासियों को बचाने का प्रयत्न किया ?
भारतीय संस्कृति को नष्ट करने के षड्यंत्र के तहत पूज्य संत आशारामजी बापू पर झूठे, बेबुनियाद आरोप लगाकर उन्हें जेल भेजा गया । दुष्कर्म नहीं हुआ यह बात लड़की स्वयं बोलती है, उसकी मेडिकल रिपोर्ट भी बोलती है । मुँह दबाया हो ऐसी कहीं कोई खरोंच भी लैबोरेटरी रिपोर्ट में नहीं पायी गयी । फिर भी ‘दुष्कर्म है, दुष्कर्म है…’ – ऐसा मीडिया का दुष्प्रचार कितना घिनौना है ! राजनीति कितनी घिनौनी है ! साजिशकर्ताओं की, धर्मांतरणवालों की साजिश कितनी घिनौनी है ! कोई भी समझ सकता है आसानी से कि साजिश है, राजकारण है, मनगढ़ंत कहानी है । पुलिस पर ऊपर से दबाव ऐसा था कि उनको तो मानसिक दबाव देकर संत आशारामजी बापू से हस्ताक्षर ही कराने थे, वे उन्होंने करवा लिये । दो-दो, तीन-तीन दिन का जागरण और मानसिक दबाव… पुलिस के मनमाफिक लिखे हुए कागजों पर व कोरे कागजों पर हस्ताक्षर करवाये गये ।
संत आशारामजी बापू के सेवादारों को भी इस घिनौनी साजिश के तहत झूठे आरोपों में फँसाया गया है । इस कलियुग में जहाँ अपनी खुद की संतान भी बात मानने को तैयार नहीं होती, ऐसे समय में एक-दो नहीं करोड़ों लोग पूज्य संत आशारामजी बापू को आदर से सुनते-मानते हैं; इसके पीछे है पूज्य संत आशारामजी बापू का संयम, सदाचार, जप, तप, तितिक्षा और विश्वमानव के परोपकार की मंगल भावना । पूज्य संत आशारामजी बापू के बारे में चल रही अनर्गल बातों में यदि जरा-सी भी सच्चाई होती तो यह समझनेवाली बात है कि करोड़ों लोग पूज्य संत आशारामजी बापू से जुड़ते ही क्यों ! और इन करोड़ों लोगों में कितने ही देश-विदेश के उद्योगपति, राजनेता, वकील, डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक आदि ऊँचे-ऊँचे पदों में हैं । साथ ही इस केस में जिनको आरोपी बनाया गया है, वे भी सम्पन्न घरों के शिक्षित लोग हैं । वे क्यों सब कुछ छोड़कर आश्रम में आते !
छिंदवाड़ा गुरुकुल में डायरेक्टर पद पर कार्यरत शरदचन्द्र भाई हैदराबाद के निवासी थे । उन्होंने हैदराबाद से ‘बायो मेडिकल इंजीनियरिंग’ और यूएसए से ‘एमएस’ की डिग्री प्राप्त की हुई है । शरदचन्द्र भाई ब्रह्मचारी हैं । उन पर आरोप लगाया गया है कि ‘वे संत आशारामजी बापू के पास लड़कियों को भेजते थे ।’ यह बिल्कुल वाहियात और झूठा आरोप है । यह तो सोचनेवाली बात है कि यदि आश्रम में ऐसी घटनाएँ होतीं तो इतना पढ़ा-लिखा, धन-धान्य से सम्पन्न व्यक्ति संत आशारामजी बापू के पास ही क्यों आता ! दूसरी बात यदि उसे ऐसे काम करने होते तो वह आश्रम क्यों आता ! आश्रम तो भगवद्भक्ति व साधना के लिए है, समाज सेवा के लिए है ।
शिल्पी गुप्ता छिंदवाड़ा गुरुकुल में छात्रावास अध्यक्षा और संचालिका के रूप में सेवारत थीं । शिल्पी बहन के ऊपर आरोप लगाया है कि वे लड़कियों को बहला-फुसलाकर संत आशारामजी बापू के पास भेजती थीं । यह आरोप सरासर झूठा और बेबुनियाद है क्योंकि शिल्पी बहन पोस्ट ग्रेजुएट हैं तथा एक सम्पन्न परिवार से हैं । उन्हें घर में पैसों की कोई कमी नहीं है कि वे पैसे के लालच में ऐसा काम करें । शिल्पी बहन के पिताजी रायपुर में ‘नगर तथा ग्राम निवेश’ में ‘संयुक्त संचालक’ पद पर हैं । यदि ऐसा कुछ होता रहता तो वे संत आशारामजी बापू से जुड़ती ही क्यों? शिल्पी बहन ने बताया था कि‘‘ईश्वर की कृपा से मेरे घर में कोई कमी नहीं है । संत आशारामजी बापू के द्वारा मुझे कभी कोई प्रलोभन नहीं दिया गया है और न फ्लैट दिया गया है और न ही ऐसा कोई ऑफर आया है कि मुझे कोई बड़ी संचालिका बना देंगे । मेरी बचपन से इच्छा थी कि सेवा करूँ और यहाँ पर आकर मुझे लगा कि यहाँ मेरा निःस्वार्थ सेवा का संकल्प पूरा हो रहा है । मेरा और पूज्य संत आशारामजी बापू का संबंध एक पिता और पुत्री का ही है । मैं संत आशारामजी बापू को पिता ही मानती हूँ ।’’
किशोर देवड़ा संत आशारामजी बापू का अंगद सेवक है, ब्रह्मचारी है । उन्होंने अपने फार्म में संत आशारामजी बापू के लिए कुटिया बनवायी थी । संत आशारामजी बापू यदि ऐसा काम करते तो यह व्यक्ति कुटिया क्यों बनवाता ? बिल्कुल मनगढ़ंत कहानी बनाकर साजिशकर्ताओं द्वारा संत आशारामजी बापू पर घृणित आरोप लगवाये जा रहे हैं ।
शिवाभाई से पुलिस रिमांड के बल पर संत आशारामजी बापू के खिलाफ बयान देने के लिए बेरहमी से मारपीट की गयी, प्रलोभन दिये गये, कान का पर्दा भी खराब कर दिया गया, चोटी उखाड़ दी गयी, कोरे कागजों पर हस्ताक्षर करवाये गये । ऐसा अत्याचार यह न्याय-प्रणाली और कानून-व्यवस्था का दुरुपयोग नहीं तो और क्या है ?
इन तथ्यों के आधार पर स्पष्ट होता है कि लड़की की कहानी विश्वास करने योग्य नहीं है । पूज्य संत आशारामजी बापू सही हैं, सच्चाई संत आशारामजी बापू के साथ है और आरोप 210 % बोगस है ।
प्रसिद्ध संतों ने आसाराम बापू को निर्दोष बताते हुए उनके खिलाफ षड्यंत्र रचना बताया है। वृंदावन के महामंडलेश्वर परमात्मानंद महाराज ने कहा कि आज की स्थिति में गो रक्षा, पर्यावरण रक्षा, गंगा, यमुना बचाओ अभियान चलाए जा रहे हैं, इसी तरह संत रक्षा के लिए भी अभियान चलाया जाना चाहिए। आसाराम बापू को साजिश के तहत फंसाया गया है। संतों पर आरोप लगने पर उनकी विशेष आयोग से जांच कराई जाए। स्वामी घनश्यामानंद ने कहा कि संतों को सामान्य श्रेणी से हटा कर विशेष दर्जा दिया जाए। सेनाचार्य स्वामी नरेशानंद ने कहा कि आसाराम बापू को बेवजह फंसाया जा रहा है। स्वामी कमलानंद ने कहा कि जेल में रहते हुए भी बापू का मस्तक चमक रहा है। स्वामी नित्यानन्द जी, स्वामी सुब्रमनियम, अशोक सिंघल, शंकराचार्य जी आदि महानुभावों ने संत आशारामजी बापू को अपना समर्थन दिया है और कहा है की संत आशारामजी बापू बेगुनाह हैं। जम्मू के फूल कुमार शास्त्री, हरिशंकर भुट्टो खान, पूर्णयोगी महाराज, हरिओम, पंचम दास, जवाहरानंद, विनोदानंद, बालयोगी पचौरी, स्वामी अशोकानंद, अमित भाई, अजय कुमार शर्मा, अरुण, किशन गुप्ता, देवेंद्र गुप्ता, सुरेश मलिक, आरबी शर्मा, रमेश चंद्र, राजकुमारी, गुड़िया शर्मा, देवेंद्र शर्मा, अजय चोपाड़े, सुभाष व्यास आदि ने भी संत आसारामजी बापू को अपना समर्थन दिया है ।
कुल मिलाकर बात यह हैं की नारायण साईं और संत आशारामजी बापू के केस को लम्बे समय तक खींचकर उनके साधकों को तोड़ने का षड़यंत्र किया जा रहा है…. रोज़ नयी नयी झूठी कहानी बनाकर बिकाऊ मीडिया हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को तोड़ने का काम खुलेआम कर रही है । शंकराचार्यजी महाराज, नित्यानंदजी महाराज, कृपालुजी महाराज आदि कई संतो पर गलत आरोप लगाया और वे सभी बाद में निर्दोष बरी किये गए.. भारत में ऐसे संतो को ही क्यों टारगेट किया जाता है ???. कृपया जरा सोचिये.. कभी मैंने मौलवी और पादरी के बारे में ऐसा खुलासा न ही सुना और न ही देखा… जबकि…. कई पादरी…. दारू पीकर सत्संग करते है… कई मौलवी मस्जिद में सभा करते है और हिन्दू विरोधी नये नये प्रोग्राम बनाते है…. अभी कोई मिडियावाला मस्जिद में जाने की हिम्मत करता है… नही क्यों ??… क्यों भारत में हिन्दुओ के विरोध में ही कानून बन रहा है ? मै कभी कभी… यह सोचती हूँ की भारत अभी भी गुलामी से मुक्त नहीं हुआ है !!!
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