
ॐ नमः शिवाय और महाशिवरात्रि
महाशिवरात्रि एक महत्वपूर्ण हिन्दू पर्व है, जो भगवान शिव की आराधना और आध्यात्मिक उन्नति के लिए समर्पित है। इस पावन रात्रि में शिव जी की भक्ति करने से आत्मशुद्धि, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
महाशिवरात्रि और “बम” बीज मंत्र
“बम” शब्द बीज मंत्र है – शिवरात्रि की रात को सवा लाख जप करने से वायु दोष, गठिया बीमारी, मानसिक तनाव आदि दूर हो जाते हैं। शिवरात्रि के दिन “बम बम भोले” का जाप करने से वायु संबंधी बीमारियां समाप्त हो जाती हैं और व्यक्ति की ऊर्जा संतुलित होती है।
ग्रह-नक्षत्रों का योग और आध्यात्मिक प्रभाव :
फाल्गुन मास की अमावस्या को ग्रह नक्षत्रों का विशेष संयोग बनता है, जिससे इस दिन की ऊर्जा अन्य दिनों की अपेक्षा अधिक शक्तिशाली होती है। यह दिन ध्यान, साधना, और भक्ति के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। शिवरात्रि के दिन उपवास और संयम रखने से व्यक्ति का मन और बुद्धि उच्च आध्यात्मिक स्तर पर पहुँचते हैं।
संयम और शिव आराधना का महत्व :
ॐ नमः शिवाय का जाप और संयम रखने से आध्यात्मिक कल्याण होता है। शिवरात्रि का प्रभाव हमारे मन, बुद्धि, और चित्त पर पड़ता है। इस दिन पति-पत्नी को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए, क्योंकि इस दिन सांसारिक कर्म करने से नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न हो सकती है, जिससे जीवन में हताशा, निराशा, और आत्महत्या के विचार उत्पन्न हो सकते हैं।
सनातन संस्कृति की महिमा :
चार प्रमुख प्राचीन संस्कृतियां हैं – मिश्र की संस्कृति, प्राचीन रोम की संस्कृति, चीन की संस्कृति और हिंदुस्तान की सनातन संस्कृति। लेकिन जहां अन्य संस्कृतियाँ विलुप्त हो गईं, वहीं भारतीय सनातन संस्कृति आज भी जीवित है। शिवालयों में आज भी लाखों करोड़ों श्रद्धालु ॐ नमः शिवाय का जाप करते हैं, जिससे भारतीय संस्कृति की जीवंतता का प्रमाण मिलता है।
शिव जी की उपासना और प्रतीकात्मकता :
भगवान शिव को व्यसन भंग का नहीं, बल्कि भुवन भंग का व्यसन है। शिव सृष्टि के ऐसे माली हैं, जो कभी-कभी उथल-पुथल मचाकर नए और सुंदर जगत की रचना करते हैं। शिव जी का वेशभूषा हमें जीवन के गहरे संदेश देती है:
मुंडों की माला – इसका अर्थ है, वे उन्हीं को स्वीकारते हैं जिनके मस्तक में भगवत ज्ञान का प्रकाश हो।
गले में सर्प – यह जीवन की अस्थिरता और माया का प्रतीक है।
शमशान की राख – हमें यह सिखाती है कि यह शरीर नश्वर है और अहंकार त्यागना चाहिए।
त्रिशूल – यह तीन प्रकार के कष्ट (आधिदैविक, आधिभौतिक, आध्यात्मिक) को दूर करने का प्रतीक है।
कैलाश पर निवास – यह ऊँचे आध्यात्मिक स्तर और मन की स्थिरता को दर्शाता है।
शिव परिवार से जीवन के संदेश :
भगवान शिव का पूरा परिवार हमें जीवन में समता, सहिष्णुता और संतुलन बनाए रखने का संदेश देता है।
शिव जी का वाहन बैल और पार्वती जी का वाहन सिंह – जो प्राकृतिक रूप से शत्रु होते हैं, लेकिन शिव के पास प्रेम और संतुलन में रहते हैं।
गणपति का वाहन चूहा और कार्तिकेय का वाहन मोर – ये एक-दूसरे के स्वाभाविक शत्रु हैं, फिर भी शिव परिवार में समरसता से रहते हैं।
महाशिवरात्रि की पूजन विधि :
व्रत और उपवास – पूरे दिन उपवास रखें या गाय का दूध, सेव फल या अंगूर लें।
शिवलिंग अभिषेक – जल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र और गंगाजल से अभिषेक करें।
ॐ नमः शिवाय का जाप – कम से कम 108 बार जाप करें।
रात्रि जागरण – पूरी रात जागकर शिव कथा, मंत्र जाप और ध्यान करें।
बिल्वपत्र चढ़ाना – बिल्वपत्र शिव जी को अत्यंत प्रिय हैं और यह वायु दोष को दूर करता है।
शिवरात्रि के चार प्रमुख रात्रियाँ :
महाशिवरात्रि – यह “अहोरात्रि” कहलाती है।
जन्माष्टमी – इसे “मोहरात्रि” कहा जाता है।
होली – यह “दारुणरात्रि” के रूप में जानी जाती है।
काली चौदस – इसे “कालरात्रि” कहते हैं।
इन चार रात्रियों में ध्यान, संयम और आध्यात्मिक साधना करने से व्यक्ति के मन और बुद्धि का स्तर उच्च केंद्रों पर पहुँच जाता है और जीवन में शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
ॐकार और शिव भक्ति का प्रभाव :
ॐ नमः शिवाय का जाप इच्छित वस्तु को प्राप्त करने और आत्मिक उन्नति के लिए सर्वोत्तम माना गया है।
रोज 108 बार ॐकार जप करने से ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है।
दुगुना जप करने वाले को विष्णु पद की प्राप्ति होती है।
तिगुना जप करने वाला साक्षात शिव तत्व में लीन हो जाता है।
आरती और मंदिर दर्शन का महत्व :
मंदिर में प्रवेश कर हाथ ऊपर उठाने से मन और प्राण उच्च स्तर पर जाते हैं। घंटा बजाने से नकारात्मक विचार शांत हो जाते हैं और सद्भावना का संचार होता है। शिव पूजा में प्रयुक्त प्रत्येक वस्तु का विशेष आध्यात्मिक महत्व है।
निष्कर्ष :
महाशिवरात्रि का यह पावन पर्व आत्मशुद्धि, भक्ति, और ध्यान के लिए एक सुनहरा अवसर है। शिवरात्रि के दिन संयम, पूजा और मंत्र जाप करने से आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
महाशिवरात्रि व्रत : 26 फरवरी
निशीथकाल
(रात्रि 12:15 से 1:04 तक)
(प्रहर :- प्रथम : शाम 6:29 से, द्वितीय : रात्रि 9:34 से, तृतीय : मध्यरात्रि 12:39 से, चतुर्थ : 27 फरवरी प्रातः 3:45 से) (पारणा : 27 फरवरी)
आओ, इस महाशिवरात्रि पर ॐ नमः शिवाय का जाप करें और अपने जीवन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दें।
ॐ नमः शिवाय।
















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