३१ जनवरी :- वराह-भीष्म-तिल द्वादशी(Bhishma-Varah-Til Dwadashi) तिल द्वादशी को जो स्नान, प्रसाद, हवन, दान व भोजन में तिल का और दीपक में तिल के तेल का उपयोग करता है, उसकी सम्पूर्ण व्याधि दूर होती है । (ब्रह्म पुराण)
१ से ३ फरवरी :- दिनत्रय व्रत (Dintraya Vrat) पूरे माघ मास स्नान करने का सामथ्र्य व अनुकूलता न होने पर त्रयोदशी से पूर्णिमा तक स्नान, दान, व्रतादि पुण्यकर्म करने से सम्पूर्ण माघस्नान का फल मिलता है ।

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