Gunga bolne laga.
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Maha Nirvan divas
पूज्य बापूजी अपनी मातुश्री पूजनीय अम्मा को ईश्वरप्राप्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने में कैसे मदद करते थे – इस विषय को उजागर करते हुए स्वंय अम्माजी बताया करती थी :
“ एक बार समाचार मिला कि साँई ( बापूजी ) उत्कण्ठेश्वर में है तो में बहू को साथ साँई के दर्शन करने गयी | उस दिन गाँव में लाइट नही थी | साँई तो एकदम फक्कड अवस्था में ध्यान – समाधि में निमग्न थे | हमने देखा कि आगे – पीछे साँप घूम रहे हैं | हम भी वहीं कुछ अंतर पर साधना करने बैठ गयी | वहाँ लोग पूछने लगे कि ‘ आप साँई की क्या लगती हैं ?’ जब लोग मुझसे पूछते तो मुझे साँई की बात याद आती | साँई ने मुझे मना कर रखा था कि ‘लोगों को नही बताना कि मेरा बेटा है, अन्यथा लोग आपको आदर – भाव देने लग जायेंगे , पूजा करने लग जायेंगे, इससे अहं जगने का खतरा रहता है | इसलिए जब तक पूर्णता को प्राप्त न होओ तब तक इन सब बातों से बचते रहना चाहिए |’ मैं कभी भी, कहीं भी नहीं बताती थी | मैं कहती कि साँई मेरे कुछ नहीं लगते |” गुरुआज्ञा – पालन में कैसी निष्ठा ! कैसी सरलता !! न कोई आडम्बर , न कोई दम्भ ! बापूजी ने कह दिया तो अक्षरशः पालन किया | अम्मा गुरुआज्ञा – पालन में इतनी तत्पर थीं, तभी तो लाखों वर्ष पुराना इतिहास फिर से नया बना दिया | जैसे माता देवहूति ने कपिल भगवान , जो कि उनके पुत्र थे , उनको गुरुरूप में निहारकर गुरुतत्व में स्थिति प्राप्त कर ली इस प्रकार अम्मा गुरुआज्ञा – पालन में तत्पर रहीं और बाह्वा बड़प्पन से बचीं तो इतनी ऊँचाई पा ली जो बड़े – बड़े योगियों को भी दुर्लभ है ! उनका पुण्यमय , पावन स्मरण करके हम भी धनभागी हो रहे हैं |
Ashram News Bulletin 29th October 2013
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Clean chit by DSP (via RTI) on Gurukul Suicides allegations
Clean Chit By Gujarat Mahila Aayog
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