
आत्मस्वरुप का ज्ञान पाने के अपने कर्त्तव्य की याद दिलाने वाला, मन को दैवी गुणों से विभूषित करनेवाला, सदगुरु के प्रेम और ज्ञान की गंगा में बारंबार डुबकी लगाने हेतु प्रोत्साहन देनेवाला जो पर्व है – वही है ‘दिवाली’ ।
हजारों मनुष्यों में कोई विरला सिद्धि के लिए यत्न करता है और उन सिद्धों में से कोई विरला मुझे तत्वतः जानता है।
आत्मसाक्षात्कार को ऐसे कोई विरले महात्मा ही पाते हैं। योगसिद्धि, दिव्य दर्शन, योगियों का आकाशगमन, खेचरी, भूचरी सिद्धियाँ, भूमि में अदृश्य हो जाना, अग्नि में प्रवेश करके अग्निमय होना, लोक-लोकान्तर में जाना, छोटा होना, बड़ा होना इन अष्टसिद्धियों और नवनिधियों के धनी हनुमानजी आत्मज्ञानी श्रीरामजी के चरणों में गये, ऐसी आत्मसाक्षात्कार की सर्वोपरि महिमा है। साधना चाह कोई कितनी भी ऊँची कर ले, भगवान राम, श्रीकृष्ण, शिव के साथ बातचीत कर ले, शिवलोक में शिवजी के गण या विष्णुलोक में जय-विजय की नाईं रहने को भी मिल जाय फिर भी साक्षात्कार के बिन यात्रा अधूरी रहती है।
दीपावली का शुभ संदेशपरम पूज्य संत श्री आशारामजी बापू –
“सबका मंगल सबका भला |”
उदासी नहीं रखना, प्रसन्नता बढ़ाए रखना;
अपने और पड़ोसियों के जीवन में सुख शांति आए |
धैर्य है आप सबका मैं इस बात पर बड़ा संतुष्ट हूँ |
तबियत तो होता रहता है …संसार है |
सत्य की जय होगी , देर सबेर लगेगा, धीरज रखना सब …..जय जय नारायण …|
आपकी सबकी मंगलमय दिवाली |
मेरी भी मंगलमय है , चिंता नहीं करना |
मुस्कुराकर गम का ज़हर जिसको पीना आ गया ,
ये हकीकत है कि जहाँ में उनको जीना आ गया |
रिपोर्टर – बापूजी इस बार जेल में मनेगी दिवाली !!
दबंग बापू – अरे जेल में नहीं सब दिलों में दिवाली है , डरो नहीं ….हरि ॐ –
दीपावली पूजन के शुभ मुहूर्त:-
ऑफिस व दुकान के लेखा-वही पूजन
1.10 pm – 2.30 pm &
5.28 pm – 8.10 pm
घर में लक्ष्मी पूजन
7.30 – 9.36 pm
जप हेतु महानिषिध काल
रात्रि 10.52 pm – 1.34 am
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