Tatvik Satsang

ब्रह्मज्ञानी सदा निर्लेपा


                                          

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   ब्रह्मज्ञानी सदा निर्लेपा

है रामजी , जब ऐसे धर्मात्मा को विवेक रूपी दीपक से आत्मा रूपी मणि मिलता है तब उसकी उचाई सुमेरु और समुद्र और आकाश से भी अधिक हो जाती है …

संसारी वो होता है जो साधना थोड़ी बहोत करता है और संसार की परिस्थिति में  उलजता हे ….

साधक उसको कहते है जो इश्वर को पाने के लिए साधना करता है |

जिसने अपनी आत्मा में स्थिति की है वो महापुरुष है उसको मेरा नमस्कार है |

ठग लो उनको वे ठगवाने के लिए तो घूमते रहते है, उनके अनुभव को अपना अनुभव बना लो…

 

 

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Ashram News

बिना सत्य के क्या 6 करोड़ अनुयायी सम्भव हैं ?


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बिना आरोप सिद्ध हुए आसाराम बापू को इतने समय तक जेल में भेजा गया! हमें मालूम है कि बापूजी जिन्होंने करोड़ों लोगों के मन पर साधना के संस्कार डाले हैं, भटके हुए लोगों को सत्य के मार्ग पर, साधना के मार्ग पर लाया है क्या वे इस प्रकार का घृणित कार्य कर सकते हैं? कदापि नहीं! तो फिर क्यों बार-बार समाचार पत्रों में या टीवी चैनलों पर कुप्रचार किया जा रहा है?’ यह बात सनातन हिन्दू जनजागृति समिति के डॉ. सुरेश गुंजाल ने जंतर-मंतर पर आयोजित एक संत-सम्मेलन में कही ।
आसाराम बापू के खिलाफ टीका-टिप्पणी करनेवाले लोगों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा ‘मैं उन विपक्षी लोगों से पूछना चाहता हूँ, जिन्होंने कभी साधना नहीं की बल्कि जो साधना करते हैं उनको भी साधना के मार्ग से अलग करने की कोशिश कर रहे हो, क्या तुम 200-400 लोगों की भी भीड़ जुटाकर अपने साथ लेकर इतने वर्षों तक चल सकते हो? नहीं। पूज्य आसाराम बापू 6 करोड़ साधकों को इतने वर्षों से साधना करा रहे हैं, क्या यह बगैर साधना के, बगैर संस्कार के, बगैर सत्य के सम्भव है?
दूसरा, बापूजी ने क्या कार्य किये? बच्चों में मूल्य-संवर्धन के लिए, नैतिक शिक्षा के लिए ‘बाल संस्कार केन्द्र’ चलवाये जा रहे हैं ताकि उनमें हमारी संस्कृति में जो बताये हुए साधना के, धर्म के मूल्य हैं उनका संवर्धन हो। तो ऐसे मूल्यों का संवर्धन करनेवाले से द्वेष क्यों?
आसाराम बापू ने धर्मांतरणवालों का विरोध करने के लिए हिन्दुओं को जागृत किया। यह भी संस्कृति-विरोधी टीवी चैनलों या हिन्दू विद्वेषी शासकों को मान्य नहीं था, इसलिए यह षड्यंत्र एवं दुष्प्रचार चल रहा है।’

 

 

 

– डॉ. सुरेश गुंजाल, सनातन हिन्दू जनजागृति समिति

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उन लोगो के लिये प्रश्न है जो लोग अक्सर हिन्दू धर्म प़र ऊँगली उठाते है और प्रतिदिन बखेड़ा खड़े करे रहते है | उन सवालों के जवाब तलाशने के लिये हम कई साधुओ के पास गये और जितनी जानकारी हम एकत्रित कर सके वह प्रस्तुत है उसके कुछ अंश. हम समझते है टीवी प़र धारावाहिकों के माध्यम से हिन्दू धर्म प़र जो दुष्प्रचार किया जा रहा है वह भ्रम लोगो में फैलना कम होगा और लोग जागृत होंगे .
क्यों करते है तुलसी है पूजा =हिन्दू स्तरीय तुलसी की पूजा अपने सोभाग्य एवं वंश वृद्धि के लिये करती है . रामायण कथा में वर्णित एक परसंग के अनुसार राम दूत हनुमान जी जब सीता का पता लगाने गये तो वहा उन्होंने एक घर के आंगन में तुलसी का पोधा देखा जो की विभिष्ण का घर था उन्होंने तुरंत अनुमान लगा लिया की यह किसी धर्म परायण व्यक्ति का घर है अर्थात तुलसी पूजा की प्रथा प्राचीन काल से चली आ रही है .
वज्ञानिक अर्थ = तुलसी की पतियों में स्क्राम्क ‘ कितानुओ ‘ को मारने की अद्भुत शक्ति होती है . तुलसी एक दिव्य ओषधि का पोधा है . जुकाम खासी , मलेरिया आदि में लाभदायक है . इतना ही नही केंसर जैसी भयानक बिमारी में भी ठीक करने में लाभदायक है .
क्यों हिन्दू धर्म में मृतक की अस्थियो को गंगा में प्रवाहित करते है = हिन्दुओ की धार्मिक आस्था के अनुसार मृतक की अस्थियो को गंगा में प्रवाहित करने से मृतक की आत्मा को शान्ति मिलती है .
वज्ञानिक अर्थ = वज्ञानिक परीक्षणों से यह निष्कर्ष निकला है की अस्थियो में फास्फोरस अत्याधिक मात्रा में पायी जाती है जो खाद के रूप में भूमि को उपजाऊ बनाने में सहायक है . गंगा नदी के जल से हमारी अन्न उपजाने वाली जमीन की सिचाई होती है . जमीन की उर्वरा शक्ति बढाने में फास्फोरस सहायक है जो की गंगा के जल में अस्थिया प्रवाहित करने के कारण बहुत अधिक मात्रा में निहित है

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सनातन संस्कृति

” सनातन संस्कृति और हिन्दू धर्म एक दुसरे के पूरक है “

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Japa, Mantra, Meditation, Occasion, Tithis

Special occasion for Japa and meditation : Ravipushyamrit Yoga


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Today is Ravipushyamrit Yoga, performing recitation and meditation will bear thousands times more virtues.
Performing recitation and meditation today (timing October 27, 2013 sunrise  to 7:14 pm IST October 27, 2013) bear thousands times more virtues, similar to the benefits of performing them during a solar/lunar eclipse. All Japa, Donations, Medications and other good deeds are considered to have multiple and better benefits. So, we should take advantage of today so that we can earn more virtues with minimal effort.

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Indian Culture

Indian Culture (भारतीय संस्कृति)


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यही है हमारी संस्कृति की पहचान. हमारी शान हिंदुस्तान !

(1). हम सब एक है |
(2). दो पक्ष- कृष्ण पक्ष , शुक्ल पक्ष !
(3). तीन ऋण – देव ऋण , पितृ ऋण , ऋषि ऋण !
(4). चार युग – सतयुग , त्रेतायुग ,द्वापरयुग , कलियुग !
चार धाम – द्वारिका , बद्रीनाथ , जगन्नाथ पूरी , रामेश्वरम धाम !
चारपीठ -शारदा पीठ ( द्वारिका ), ज्योतिष पीठ ( जोशीमठ बद्रिधाम ) , गोवर्धन पीठ ( जगन्नाथपुरी ) , श्रन्गेरिपीठ !
चार वेद- ऋग्वेद , अथर्वेद , यजुर्वेद , सामवेद !
चार आश्रम -ब्रह्मचर्य , गृहस्थ , वानप्रस्थ , संन्यास !
चार अंतःकरण -मन , बुद्धि , चित्त , अहंकार !
(5). पञ्च गव्य – गाय का घी , दूध , दही ,गोमूत्र , गोबर !
पञ्च देव – गणेश , विष्णु , शिव , देवी ,सूर्य !
पंच तत्त्व – पृथ्वी , जल , अग्नि , वायु , आकाश !
(6).  छह दर्शन – वैशेषिक , न्याय , सांख्य ,योग , पूर्व मिसांसा , दक्षिण मिसांसा !
(7).  सप्त ऋषि – विश्वामित्र , जमदाग्नि ,भरद्वाज , गौतम , अत्री , वशिष्ठ और कश्यप!
सप्त पूरी -अयोध्या पूरी ,मथुरा पूरी , माया पूरी ( हरिद्वार ) , काशी ,कांची ( शिन कांची – विष्णु कांची ) , अवंतिका और द्वारिका पूरी !
(8).  आठ योग – यम , नियम , आसन ,प्राणायाम , प्रत्याहार , धारणा , ध्यान एवं समाधी !
आठ लक्ष्मी – आग्घ ,विद्या , सौभाग्य ,अमृत , काम , सत्य , भोग ,एवं योग लक्ष्मी !
(9).  नव दुर्गा — शैल पुत्री , ब्रह्मचारिणी ,चंद्रघंटा , कुष्मांडा , स्कंदमाता , कात्यायिनी ,कालरात्रि , महागौरी एवं सिद्धिदात्री !
(10.  दस दिशाएं – पूर्व , पश्चिम , उत्तर , दक्षिण ,इशान , नेऋत्य , वायव्य , अग्नि , आकाश एवं पाताल !
(11).   मुख्य ११ अवतार – मत्स्य , कच्छप , वराह ,नरसिंह , वामन , परशुराम ,श्री राम , कृष्ण , बलराम , बुद्ध , एवं कल्कि !
(12)  बारह मास – चेत्र , वैशाख , ज्येष्ठ ,अषाढ , श्रावण , भाद्रपद , अश्विन , कार्तिक ,मार्गशीर्ष , पौष , माघ , फागुन !
बारह राशी – मेष , वृषभ , मिथुन ,कर्क , सिंह , कन्या , तुला , वृश्चिक , धनु , मकर , कुंभ , कन्या !
बारह ज्योतिर्लिंग – सोमनाथ , मल्लिकार्जुन ,महाकाल , ओमकारेश्वर , बैजनाथ , रामेश्वरम ,विश्वनाथ , त्र्यंबकेश्वर , केदारनाथ , घुष्नेश्वर ,भीमाशंकर ,नागेश्वर !
(13). सब कुछ तेरा तेरा तेरा

(14). चौदह भुवन
(15). पंद्रह तिथियाँ – प्रतिपदा ,द्वितीय , तृतीय , चतुर्थी , पंचमी , षष्ठी , सप्तमी , अष्टमी ,नवमी ,दशमी , एकादशी , द्वादशी , त्रयोदशी , चतुर्दशी , पूर्णिमा , अमावष्या !
भारतीय संस्कृति की स्मृतियां – मनु , विष्णु , अत्री , हारीत , याज्ञवल्क्य , उशना , अंगीरा , यम , आपस्तम्ब , सर्वत ,कात्यायन , ब्रहस्पति , पराशर , व्यास , शांख्य, लिखित , दक्ष , शातातप , वशिष्ठ !

आओ सभी भारतीय भाई बहन मिलके इस संस्कृति की रक्षा के लिए एक झूट होकर सच्चाई  का साथ दे ।

ॐ शाति ।। जय हिन्द ।। जय संस्कृत ।। जय भारत ।। वंदे मातरम् ।।

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