वैसे तो हम शांति के पक्षधर हैं, शांति हमारी रगों में है लेकिन आज सत्ता की गलत नीतियों के चलते और मीडिया की मिलीभगत से कितने ही संतों को बदनाम करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है । उनके उस षड्यंत्र का पर्दाफाश करने के लिए संतों और जनता को संगठित होना पड़ेगा ।
अगर इस भारतभूमि पर कोई अनैतिक कृत्य होता है और आप देखते रहते हो तो यह आपकी सबसे बड़ी नाकामी है । इसलिए हर व्यक्ति प्रतिदिन एक घंटे का समय संस्कृति रक्षा, राष्ट्र रक्षा और संत रक्षा के लिए दे, राष्ट्र के विकास के लिए दे, राष्ट्र की कुरीतियों के उन्मूलन के लिए दे । और जिस दिन हर व्यक्ति एक घंटा चिंतन करेगा और सभी परस्पर एकजुट होकर नकारात्मक प्रवृत्ति के लोगों के साथ बैठकर संवाद करोगे और उनके मस्तक के कचरे को निकालकर दफन कर दोगे, उसी दिन भारत विश्वगुरु के रूप में पुनः उभर आयेगा । इसके लिए सबको सामूहिक प्रयास करने की जरूरत है ।
संतों के आदेशों-निर्देशों, मूल्यों-मान्यताओं को अगर आप अपने जीवन में उतारें और जो हमारी संस्कृति, आस्था के केन्द्रों पर प्रहार करते हैं उनको रोकने के लिए उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत ।…
उठिये, जागिये और जगाने के लिए इस समय में भीष्म पितामह की भूमिका में संत आशारामजी बापू आपके साथ हैं । उनके आदेशों-निर्देशों को सभी शिरोधार्य करें तो वह दिन दूर नहीं कि भारत अपने खोये हुए गौरव, मान-सम्मान-स्वाभिमान को पुनः प्राप्त करेगा ।
जिनके रोम-रोम से विश्वबंधुत्व, विश्वशांति, ‘सर्वभूतहितेरतः’ की महक फैलती है, उन परम पूज्य बापूजी के दर्शन – सत्संग से हम भक्तों को जो अनुभूति होती है वह अवर्णीय है और प्रेम, करुणा, वात्सल्य की वे जो साक्षात् मूर्ति दिखाई देते है, उन पूज्य बापूजी को हम सभी शिष्य वंदन करते है ।
‘मातृदेवो भव । पितृदेवो भव । आचार्यदेवो भव ।’ को पुनर्जागृत करने की जो परम्परा बापूजी ने आरम्भ की है, उसके लिए पूरा विश्व संत श्री आशाराम बापूजी का आभारी है । जो बापूजी की शिक्षा है, ऋषियों की, संतों की, हमारे गुरुओं की शिक्षा है, हमारी मर्यादा और परम्पराओं की जो शिक्षा है, हम उसके ऊपर द्रढ़ता से चलें ।
पूज्य बापूजी !
इलाही हमारी नजरों में
वो तासीर आ जाय ।
जहाँ भी देखें, जिसे भी देखें,
बस आपकी तस्वीर नजर आ जाय ।।
हमने अवतारों की कथा तो बहुत सुनी है लेकिन अवतार का प्रत्यक्ष दर्शन वर्त्तमान समय में हो रहा है – पूज्य आशारामजी बापू के रूप में । दुनिया के १५६ से ज्यादा देशों से पूज्य आशारामजी बापू का नाद सुनाई दिया है, लोग “ हरि ॐ “ बोलते सुनाई देते हैं ।
हमारे संतों, देवी-देवताओं और संस्कृति के ऊपर अपमान, अफवाह और कुप्रचार का षड्यंत्र चल रहा है । बापूजी हम लाखों-करोड़ो भक्तों के हृदय में हैं । हमें मालूम है संत कौन हैं, हमारे देव कौन हैं, हमारी परम्परा क्या है । बापूजी का अपमान व कुप्रचार ज्यादा समय तक चलनेवाला नहीं है । लाखों- करोड़ो हृदयों में जो संतों का एक पवित्र स्थान है, वह कोई भी मिटा नहीं सकता !
हम भारत के संविधान को अपील करते है कि निर्दोष संत को बाइज्जत रिहा करें और कुदरत के कोप से इस देश को बचायें |
जय हिंद | जय भारत ||


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