संत वाणी

Conversation with Himalayan Yogies


 

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Conversation with Himalayan Yogies

ईच्छा के शमन से परम पद की प्राप्ति होती है | ईच्छारहित हो जाना यही निर्वाण है और ईच्छायुक्त होना ही बंधन है | अतः यथाशक्ति ईच्छा को जीतना चाहिये | भला इतना करने में क्या कठिनाई है  ?

जन्म, जरा, व्याधि और मृत्युरूपी कंटीली झाड़ियों और खैर के वृक्ष – समूहों की जड़ भी ईच्छा ही है | अतः शमरूपी अग्नि से अंदर-ही-अंदर बीज को जला ड़ालना चाहिये| जहाँ ईच्छाओं का अभाव है वहाँ मुक्ति निश्चित है  |

विवेक वैराग्य आदि साधनों से ईच्छा का सर्वथा विनाश करना चाहिये | ईच्छा का संबंध जहाँ-जहाँ है वहाँ-वहाँ पाप, पुण्य, दुखराशियाँ और लम्बी पीड़ाओं से युक्त बंधन को हाज़िर ही समझो | पुरुष की आंतरिक ईच्छा ज्यों-ज्यों शान्त होती जाती है, त्यों-त्यों मोक्ष के लिये उसकाकल्याणकारक साधन बढ़ता जाता है | विवेकहीन ईच्छा को पोसना, उसे पूर्ण करना यह तो संसाररूपी विष वृक्ष को पानी से सींचने के समान है  |

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संत वाणी

Know What you Want ?


Untitled-1क्या आप अपने-आपको दुर्बल मानते हो ? लघुताग्रंथी में उलझ कर परिस्तिथियों से पिस रहे हो ? अपना जीवन दीन-हीन बना बैठे हो ?
…तो अपने भीतर सुषुप्त आत्मबल को जगाओ | शरीर चाहे स्त्री का हो, चाहे पुरुष का, प्रकृति के साम्राज्य में जो जीते हैं वे सब स्त्री हैं और प्रकृति के बन्धन से पार अपने स्वरूप की पहचान जिन्होंने कर ली है, अपने मन की गुलामी की बेड़ियाँ तोड़कर जिन्होंने फेंक दी हैं, वे पुरुष हैं | स्त्री या पुरुष शरीर एवं मान्यताएँ होती हैं | तुम तो तन-मन से पार निर्मल आत्मा हो |
जागो…उठो…अपने भीतर सोये हुये निश्चयबल को जगाओ | सर्वदेश, सर्वकाल में सर्वोत्तम आत्मबल को विकसित करो |
आत्मा में अथाह सामर्थ्य है | अपने को दीन-हीन मान बैठे तो विश्व में ऐसी कोई सत्ता नहीं जो तुम्हें ऊपर उठा सके | अपने आत्मस्वरूप में प्रतिष्ठित हो गये तो त्रिलोकी में ऐसी कोई हस्ती नहीं जो तुम्हें दबा सके |
भौतिक जगत में वाष्प की शक्ति, ईलेक्ट्रोनिक शक्ति, विद्युत की शक्ति, गुरुत्वाकर्षण की शक्ति बड़ी मानी जाती है लेकिन आत्मबल उन सब शक्तियों का संचालक बल है |
आत्मबल के सान्निध्य में आकर पंगु प्रारब्ध को पैर मिल जाते हैं, दैव की दीनता पलायन हो जाती हैं, प्रतिकूल परिस्तिथियाँ अनुकूल हो जाती हैं | आत्मबल सर्व रिद्धि-सिद्धियों का पिता है |

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पर्व विशेष

मासिक शिवरात्रि – 20 दिसम्बर


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मासिक शिवरात्रि {Masik Shivratri}

 

वर्ष में एक महाशिवरात्रि आती है और हर महीने में एक मासिक शिवरात्रि आती है। यही मासिक शिवरात्रि यदि मंगलवार के दिन पड़े तो उसे भौम प्रदोष व्रत कहते हैं। मंगलदेव ऋणहर्ता देव हैं। उस दिन संध्या के समय यदि भगवान भोलेनाथ का पूजन करें तो भोलेनाथ की, गुरु की कृपा से हम जल्दी ही कर्ज से मुक्त हो सकते हैं। इस दैवी सहायता के साथ थोड़ा स्वयं भी पुरुषार्थ करें। पूजा करते समय यह मंत्र बोलें –
मृत्युंजयमहादेव त्राहिमां शरणागतम्।
जन्ममृत्युजराव्याधिपीड़ितः कर्मबन्धनः।।

 

मासिक शिवरात्रि को शिवजी के १७ मंत्र –

हर मासिक शिवरात्रि को सूर्यास्‍त के समय अपने घर में बैठकर अपने गुरुदेव का स्मरण करके शिवजी का स्मरण करते करते ये 17 मंत्र बोलें । ‘जो शिव है वो गुरु है, जो गुरु है वो शिव है’ इसलिये गुरुदेव का स्मरण करते है । जिसकी गुरुदेव में दृढ़ भक्ति है वो गुरुदेव का स्मरण करते-करते मंत्र बोले | आस-पास शिवजी का मंदिर तो जिनके सिर पर कर्जा ज्यादा हो वो शिवमंदिर जाकर दिया जलाकर ये १७ मंत्र बोले –

१) ॐ शिवाय नम:

२) ॐ सर्वात्मने नम:

३) ॐ त्रिनेत्राय नम:

४) ॐ हराय नम:

५) ॐ इन्द्र्मुखाय नम:

६) ॐ श्रीकंठाय नम:

७) ॐ सद्योजाताय नम:

८) ॐ वामदेवाय नम:

९) ॐ अघोरह्र्द्याय नम:

१०) ॐ तत्पुरुषाय नम:

११) ॐ ईशानाय नम:

१२) ॐ अनंतधर्माय नम:

१३) ॐ ज्ञानभूताय नम:

१४) ॐ अनंतवैराग्यसिंघाय नम:

१५) ॐ प्रधानाय नम:

१६) ॐ व्योमात्मने नम:

१७) ॐ युक्तकेशात्मरूपाय नम:

उक्‍त मंत्र बोलकर अपने इष्ट को, गुरु को प्रणाम करके यह शिव गायत्री मंत्र बोलें–

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे | महादेवाय धीमहि, तन्नो रूद्र प्रचोदयात् ||

जिनके सिर पर कर्जा है वो शिवजी को प्रणाम करते हुये ये १७ मंत्र बोले कि मेरे सिर से ये भार उतर जाये | मैं निर्भार जीवन जी सकूं, भक्ति में आगे बढ़ सकूं| केवल समस्या को याद न करता रहूँ |

  • Shri Sureshanandji
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Achyutaya Product

अच्युताय पुष्टि गोल्ड वटी


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Benefits :- अश्वगंधादि सप्तधातुवर्धक , रसायन व बलवर्धक द्रव्यों से बनी यह वटी शरीर को पुष्ट , बलवान व वीर्यवान बनाती है । वृद्धावस्था को दूर रखकर दीर्घ यौवन की प्राप्ति कराती है! गर्भिणी माताएँ, वृद्ध,कृश व दुर्बल व्यक्ति तथा धातुक्षय अथवा पुरानी बिमारी के कारण क्षीण हुए व्यक्तियों के लिए ‘पुष्टि गोल्ड’ वटी वरदान स्वरुप है । इन दिनों में स्निग्ध, मधुर व पौष्टिक पदार्थ जैसे – घी , मक्खन, केला , खजूर आदि का सेवन विशेष रूप से करें । Direction For Use :- -४ गोलियाँ सुबह शाम दूध, घी अथवा शहद के साथ लें ।

Available at all sant shri asaram ji bapu ashram and sat sahitya kendra.

 

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