यौगिक प्रयोग

तृप्ति प्राणायाम


तृप्ति प्राणायाम

Trupti Pranayam

तुम अपने को दीन-हीन कभी मत समझो। तुम आत्मस्वरूप से संसार की सबसे बड़ी सत्ता हो। तुम्हारे पैरों तले सूर्य और चन्द्र सहित हजारों पृथ्वियाँ दबी हुई हैं। तुम्हें अपने वास्तविक स्वरूप में जागने मात्र की देर है। अपने जीवन को संयम-नियम और विवेक वैराग्य से भरकर आत्माभिमुख बनाओ। अपने जीवन में ज़रा ध्यान की झलक लेकर तो देखो! आत्मदेव परमात्मा की ज़री झाँकी करके तो देखो! बस, फिर तो तुम अखण्ड ब्रह्माण्ड के नायक हो ही। किसने तुम्हें दीन-हीन बनाए रखा है? किसने तुम्हें अज्ञानी और मूढ़ बनाए रखा है? मान्यताओं ने ही ना…? तो छोड़ दो उन दुःखद मान्यताओं को। जाग जाओ अपने स्वरूप में। फिर देखो, सारा विश्व तुम्हारी सत्ता के आगे झुकने को बाध्य होता है कि नहीं? तुमको सिर्फ जगना है…. बस। इतना ही काफी है। तुम्हारे तीव्र पुरूषार्थ और सदगुरू के कृपा-प्रसाद से यह कार्य सिद्ध हो जाता है।

कुण्डलिनी प्रारम्भ में क्रियाएँ करके अन्नमय कोष को शुद्ध करती है। तुम्हारे शरीर को आवश्यक हों ऐसे आसन, प्राणायाम, मुद्राएँ आदि अपने आप होने लगते हैं। अन्नमय कोष, प्राणमय कोष, मनोमय कोष की यात्रा करते हुए कुण्डलिनी जब आनन्दमय कोष में पहुँचती है तब असीम आनन्द की अनुभूति होने लगती है। तमाम शक्तियाँ, सिद्धियाँ, सामर्थ्य साधक में प्रकट होने लगता है। कुण्डलिनी जगते ही बुरी आदतें और व्यसन दूर होने लगते हैं।

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भजनामृत

गुरु का प्यार मिल जाए , बहारें ही बहारें हैं !


guru ka pyar mil jaye

 

गुरु का प्यार मिल जाए , बहारें ही बहारें हैं
गुरु की रहमत मिल जाए ,बहारें ही बहारें हैं
वो तारणहार मिल जाए नज़ारे ही नज़ारे हैं

जिसे मिल जाए इनका दर , वो भटके क्यों भला जग में
गुरु का द्वार है सांचा , न कोई सार है जग में
इन्ही से प्यार हो जाए बहारें ही बहारें हैं ….

जहाँ इनके चरण पड़ते वो धरती बनती है
इनके चरणों में रह पाऊँ मेरी बस ये ही विनती है
शरण जो इनकी मिल जाए , बहारें ही बहारें हैं …..

गुरुदेव …….गुरुदेव ……मेरे गुरुदेव ……….

सभी को प्यार करते हैं , दुखों से पार करते हैं
जो इनसे प्रेम करता है , उसे भव पार करते हैं
लगन जो इनसे लग जाए बहारें ही बहारें हैं
इन्ही में प्रीति हो जाए ..बहारें ही बहारें हैं ………

शमा बदले जहाँ भी तू एक पल भी ठहर जाए
बहारे खिलखिलाए , फिजाए भी महक जाए
तेरा दीदार हो जाए , बहारें ही बहारें हैं

मिटाए संकट हैं भारी , ये ही हैं शंकर त्रिपुरारी
इन्ही की महिमा है भारी , इन्ही से खुशिया हैं सारी
मति मेरी सुधर जाए बहारें ही बहारें हैं ……

करें हर पल ही रखवाली मिटाते हैं संकट ये सारे
इन्हें जो अपना माने तो करें हैं फिर वारे नारे
यही साँसों में बस जाए , बहारें ही बहारें हैं …..

विकारों से बचाते हैं बढ़ाएं भक्ति में आगे
सदा ही ध्यान रखते हैं , जगाते हैं हमें आके
इन्ही की राह मिल जाए बहारें ही बहारें हैं
इन्ही की चाह हो जाए बहारें ही बहारें हैं

निराली शान है इनकी , ये ही सरताज हैं सबके
मेरे मालिक मेरे साहिब सवारें काज हैं सबके
इन्ही में सार दिख जाए बहारें ही बहारें हैं …..

वो तारणहार मिल जाए बहारें ही बहारें हैं ….

गुरु का प्यार मिल जाए बहारें ही बहारें हैं …….

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False Allegations

देश में यौन-उत्पीड़न के झूठे मामलों की बाढ़


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देश में यौन-उत्पीड़न के झूठे मामलों की गम्भीर अवदशा को देखते हुए दिल्ली के सत्र न्यायाधीश वीरेन्द्र भट्ट ने फास्ट ट्रैक कोर्ट में झूठे दुष्कर्म से जुड़े एक मामले में आरोपी को बरी करते हुए कहाः “दिल्ली में चलती बस में रेप की घटना के बाद ऐसा माहौल बन गया है कि यदि कोई महिला बयान दे देती है कि उसके साथ रेप हुआ है तो उसे ही अंतिम सत्य मान लिया जाता है और कथित आरोपी को गिरफ्तार कर उसके खिलाप आरोप पत्र दाखिल कर दिया जाता है। इसके चलते देश में यौन-उत्पीड़न के झूठे मामलों की बाढ़ सी आ गयी है, अपराध के आँकड़े बढ़ रहे हैं।”

आँकड़े बताते हैं कि 2012 में 46 प्रतिशत दोषमुक्त हुए लेकिन 2013 के शुरुआती 8 महीनों में ही यह आँकड़ा 75 प्रतिशत पर जा पहुँचा। विशेषज्ञों का मानना है कि संशोधित कानून ‘अस्पष्ट’ होने के कारण उसका गलत रूप से इस्तेमाल हो रहा है। एक सीनियर प्रासीक्यूटर ने कहाः ‘दोषमुक्त होने के 90 प्रतिशत मामलों में तथाकथित पीड़िताएँ और आरोपी व्यक्ति के बीच आपसी दुश्मनी जैसी बातें सामने आयी हैं।”

कानून की रहम का आजकल तथाकथित पीड़िताएँ बेहद नाजायज फायदा उठा रही हैं। वे न्यायालय की ओर से भयमुक्त होने के कारण निर्दोष लोगों पर बिना सिर-पैर के लांछन लगाने

में तनिक भी नहीं हिचकिचाती हैं। अब देखना यह है कि सरकार इन तीव्र गति से बढ़ते झूठे

बलात्कार के मामलों की रोकथाम के लिए कौन से कदम उठाती है ।

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संत वाणी

ध्यान संकीर्तन (महाशिवरात्रि महोत्सव )


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Dhyan Sankirtan In the Holy Presence of Param Pujya Asaramji Bapu.
Lacks of people are being benefited without any noise ,
When We will go to take Golden Gift ??
Endearingly called ‘Bapu ji'(Asaram Bapu Ji), His Holiness is a Self-Realized Saint from India. Pujya Asaram Bapu ji preaches the existence of One Supreme Conscious in every human being; be it Hindu, Muslim, Christian, Sikh or anyone else. Pujya Bapu ji represents a confluence of Bhakti Yoga, Gyan Yoga & Karma Yoga.

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संत वाणी

वृत्तियों का खिलवाड़


vrittiyo ka khilvad

लोग क्यों दुःखी हैं ? क्योंकि अज्ञान के कारण वे अपने सत्यस्वरूप को भूल गये हैं और अन्य लोग जैसा कहते हैं वैसा ही अपने को मान बैठते हैं | यह दुःख तब तक दूर नहीं होगा जब तक मनुष्य आत्म-साक्षात्कार नहीं कर लेगा |

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