Om Om Om hari Om Om Om
‘जैसे अग्नि सुवर्ण आदि धातुओं के मल को नष्ट कर देती है, ऐसे ही भक्ति से किया गया भगवान का कीर्तन सब पापों के नाश का अत्युत्तम साधन है।’
पाश्चात्य वैज्ञानिक डॉ. डायमंड अपने प्रयोगों के पश्चात जाहिर करता है कि पाश्चात्य रॉक संगीत, पॉप संगीत सुनने वाले और डिस्को डास में सम्मिलित होने वाले, दोनों की जीवनशक्ति क्षीण होती है, जबकि भारतीय शास्त्रीय संगीत और हरि-कीर्तन से जीवनशक्ति का शीघ्र व महत्तर विकास होता है। हरि-कीर्तन हमारे ऋषि-मुनियों एवं संतों ने हमें आनुवंशिक परंपराओं के रूप में प्रदान किया है और यह भोग-मोक्ष दोनों का देने वाला है।
जापान में एक्यप्रेशर चिकित्सा हुआ। उसके अनुसार हाथ की हथेली व पाँव के तलवों में शरीर के प्रत्येक अंग के लिए एक निश्चित बिंदु है, जिसे दबाने से उस-उस अंग का आरोग्य-लाभ होता है। हमारे गाँवों के नर-नारी, बालक-वृद्ध यह कहाँ से सीखते? आज वैज्ञानिकों ने जो खोजबीन करके बताया वह हजारों-लाखों साल पहले हमारे ऋषि-मुनियों, महर्षियों ने सामान्य परंपरा के रूप में पढ़ा दिया कि हरि-कीर्तन करने से तन-मन स्वस्थ और पापनाश होता है। हमारे शास्त्रों की पुकार हरि-कीर्तन के बारे में इसीलिए है ताकि सामान्य-से-सामान्य नर-नारी, आबालवृद्ध, सब ताली बजाते हुए कीर्तन करें, भगवदभाव में नृत्य करें, उन्हें एक्यूप्रेशर चिकित्सा का अनायास ही फल मिले, उनके प्राण तालबद्ध बनें (प्राण तालबद्ध बनने से, प्राणायाम से आयुष्य बढ़ता है), मन के विकार, दुःख, शोक आदि का नाश हो और हरिरसरूपी अमृत पियें।
इसीलिए तुलसीदासजी ने कहा हैः
रामनाम की औषधि खरी नियत से खाय।
अंगरोग व्यापे नहीं महारोग मिट जाय।।

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