Mahapurush

गीता का ज्ञान और नेताजी सुभाषचंद्र बोस


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Netaji Subhaschandra Bos

चन्द्रशेखर आजाद हों, सरदार भगत सिंह, आचार्य विनोबा भावे, महात्मा गाँधी, खुदीराम बोस या नेताजी सुभाषचन्द्र बोस हों भारत के सभी प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों को भगवान श्रीकृष्ण की अद्भुत देन ‘श्रीमद्भगवद्गीता अत्यंत प्रिय थी ।
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक महान वीर योद्धा की छाप छोडनेवाले नेताजी सुभाषचंद्र बोस तो गीता को हमेशा अपने जेब में ही रखते थे । जब भी उन्हें थोडा-सा भी समय मिलता तो वे गीता का पाठ कर लेते थे । चाहे कितना भी आवश्यक कार्य आ पडे, रोज सुबह स्नान करने के बाद वे गीता का पाठ अवश्य करते थे ।
भगवान् श्रीकृष्ण के श्रीमुख से निकले उपनिषदों के इस अमृत को पीकर नेताजी ने अकेले ही एक लाख वीर सिपाहियों की ‘आजाद हिन्द फौज तैयार करके ब्रिटिश शासन को कंपा दिया था ।
आजाद  हिन्द  फौज  के  सेनानी  वयोवृद्ध  कैप्टन एस.एस. यादव बताते हैं : ‘‘एक बार भारी गोलाबारी चल रही थी । साथियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नेताजी ने सभी से सुरक्षित जगह पर जाने को कहा परन्तु वे स्वयं मोर्चे से नहीं हटे । ऐसी भयानक स्थिति में भी उनके चेहरे पर भय एवं चिन्ता की एक लकीर भी नहीं दिखती थी । नेताजी का धैर्य एवं साहस देखकर अन्य साथियों में भी जोश भर गया । कोई भी वहाँ से नहीं हटा । यह एक बडा आश्चर्य था कि इतनी गोलाबारी होने पर भी हमारे किसी साथी का बाल भी बाँका नहीं हुआ ।
वह गीता का ज्ञान ही तो था जिसने नेताजी को विपरीत परिस्थितियों तथा विरोधों के बीच भी पर्वत-सा अटल, सिंह जैसा साहसी व निर्भय बना दिया था । धन्य है गीता का ज्ञान ! तथा धन्य हैं इसे अपने जीवन में उतारनेवाले भारतमाता के वे लाडले जिनके त्याग एवं बलिदान के कारण हम आजादी की श्वास ले रहे हैं ।
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