राजस्थान के जोधपुर जिले में देखने को मिला आशाराम जी बापू के साधकों की भक्ति का अद्भुत नज़ारा | षड्यंत्रकारियों ने बापू जी को समाज में बदनाम करने की कोई कसर नहीं छोड़ी | लेकिन जिस तरह आंधी और तूफान कमज़ोर वर्ग के पेड़ और पौधों को तो उखाड़ फेंकते हैं, परन्तु मजबूत पेड़ तो ज़मीन को पकड़े ही रहते हैं ; उनका कोई भयावह तूफ़ान भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता, ठीक उसी तरह बापू जी के साधक अब इतने पक्के हो गए हैं कि कोई चाहे कितना भी उनके गुरु के खिलाफ़ साज़िश क्यों न रच ले, चाहे कितने ही आरोप क्यों न लगा ले ; परन्तु उनकी श्रद्धा, भक्ति व निष्ठा को कोई डगमगा भी नहीं सकता |
यही नज़ारा पूरे देश में था आशाराम जी बापू के 74 वें अवतरन दिवस पर | देश के कोने-कोने में साधकों ने बड़ी धूम – धाम और जन सेवा द्वारा बापू का अवतरण दिवस मनाया | जोधपुर जेल के बाहर बारिश होने के बावजूद हिम्मत और साहस खोये बिना दीप प्रज्वलन तथा कीर्तन किया गया |
देश के लगभग हर राज्य से भक्तों का हुजूम अपने गुरु को अवतरण दिवस की बधाई देने जेल के बाहर एकत्रित हुआ | हर चेहरा अपने गुरु की एक झलक पाने को बेताब था | आंसुओं से भीगी आँखे अपना दर्द ज़ाहिर कर रहीं थी | लेकिन फिर भी अपने गुरुदेव की दी गई सीख “सेवा परमो धर्मः” को याद रखते हुए भक्तजनों ने गुरुदेव के अवतरण दिवस को “विश्व सेवा दिवस” के रूप में मनाया |
“बापू को जेल गये हुए आठ महीने बीत चुके हैं,
लेकिन साधकों की श्रद्धा आज भी अडिग है,
इस बात को उन्होंने बापू जी के
अवतरण दिवस पर साबित कर दिया | “
श्रद्धालुओं की ऐसी अटूट श्रद्धा देख कर वे झूठे षड्यंत्रकारी भी आज शर्म से कहीं मुंह छिपा रहे होंगें जो इतना–इतना कुप्रचार और घिनौने आरोपों के बाद भी वे न तो बापू जी की प्रतिष्ठा गिरा पाए और न ही साधकों की संख्या कम कर पाए |
इससे सिद्ध होता है कि कोई चाहे कोई कितनी ही कोशिश क्यों न कर ले लेकिन महापुरुषों की प्रतिष्ठा को चोटिल नहीं कर सकता; कुछ समय लिए अपने कुकृत्यों से आहत करने की कोशिश भले ही कर ले, परन्तु मिटा नहीं सकता| ऐसे महापुरुष सूरज की तरह चमक बिखेर कर संसार का मंगल और कल्याण करते रहते हैं |





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