संत वाणी

जीवन का सार क्या है और कैसे प्राप्त करें ?


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जीवन का सार क्या है और उसको कैसे प्राप्त करें

संत श्री आशारामजी बापू की अमृतवाणी

सत्संग के मुख्य अंश :

* जितना समय संसार के व्यवहारों में लगाते है, अंत में कुछ नहीं मिलेगा | बोलने कि अपेक्षा न बोलना उत्तम है, अगर बोलना ही पड़े तो भीष्म जी कहते है युधिष्ठिर को कि सत्य बोले, सारगर्भित बोले, प्रिय बोले, हितकर बोले |

* जैसे संसार कि झाग में कुछ रखा नहीं, देखने मात्र को है, वैसे ही ये संसार देखने भर को है | तो जिसके पीछे अज्ञानी लोग खप रहे है, उसमे कुछ सार नहीं है |

* संसार का सार शरीर है, शरीर का सार इन्द्रियां है, इन्द्रियों का सार मन है, मन का सार बुद्धि है, बुद्धि का सार चिदावली है और चिदावली का सार वो चैतन्य मेरा आत्मा है | उस सार में टिकना ही सार है, संसार अनित्य समझना ही सार है |

* ईमानदारी से अगर आप सेवाकार्य, धर्म का अनुष्ठान करते हो तो आप को वैराग्य आएगा, संसार तुच्छ लगेगा | अगर संसार तुच्छ नहीं लगता तो आप ने सेवा नहीं किया है, आपने धर्म का अनुष्ठान, आचरण नहीं किया है | इन्द्रियां बड़ी दुष्ट है, मनुष्य को अपने जीवन-काल में 5 कर्मेन्द्रियाँ, 5 ज्ञानेन्द्रियाँ और 11वाँ मन संयत कर लेना चाहिए

* किसी की मिल्कियत नहीं रहेगी, किसी का सम्बन्ध नहीं रहेगा, लेकिन मरने के बाद भी जिसके साथ आपका सम्बंध नहीं टूटता, उस “मैं स्वरुप आत्मा को पहचानो, उसके आनंद को पाओ, यही सार है”

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Bapuji, Bhajan

जोगी का ज्ञान करें है नित्य उजाला सतत सभी के हृदय में ….


सूर्य करें है दिन में उजाला, चाँद करें है रात में, जोगी का ज्ञान करें है नित्य उजाला सतत सभी के हृदय में ….

Hami se hai jamana 45

जोगी रे क्या जादू है तुम्हरे प्यार में…..
जोगी रे क्या जादू है तेरे प्यार में… जोगी रे क्या जादू है तुम्हरे ज्ञान में…
सौभाग्य से मिले ये जोगी, सबको धन्य किया है।
शांति, प्रेम और ज्ञान का, अमृत, हमने यहीं पिया है।।
जोगी रे क्या जादू है तुम्हरे जोग में…
दूर भगाकर सारी उदासी, सबको प्रसन्नता देते।
तन-मन पुलकित कर देते, बदले में कुछ नहीं लेते।।
जोगी रे क्या जादू है तुम्हरे प्यार में….
दुर्बलता कायरता मिटाकर, हमको वीर बनाते।
बल के भाव हैं भीतर भरते, हर विपदा को हटाते।।
जोगी रे क्या जादू है तुम्हरे ज्ञान में….
जोगी के दर पे हम आये, भाग्य हमारा जागे।
दर्शन करके इस जोगी के, शोक दुःख सब भागे।।
जोगी रे क्या जादू है तुम्हरे जोग में…..
जब-जब मेरा जोगी झूमे, लगे है सावन आया।
मुरझाये दिल खिल जाते हैं, वसंत जैसे छाया।।
जोगी रे क्या जादू है तुम्हरे प्यार में….
बड़ा सलोना जोगी मेरा, मनभावन और पावन।
जब भी आये लगे है जैसे, खुशियों का हो सावन।।
जोगी रे क्या जादू है तुम्हरे ज्ञान में….
चिंता शोक न तनिक रहे यहाँ, ऐसी आभा इनकी।
शरण जो आये दरस जो पाये, बदली दुनिया उनकी।।
जोगी रे क्या जादू है तुम्हरे जोग में….
जोगी की संगति में आकर, ऊँचा धन है पाया।
कोई इसको छुड़ा न पाये, शाश्वत रंग लगाया।।
जोगी रे क्या जादू है तुम्हरे प्यार में….
सूर्य करे है दिन में उजाला, चाँद करे रातों में।
जोगी ज्ञान का करे उजाला, सतत सभी के दिलों में।।
जोगी रे क्या जादू है तुम्हरे ज्ञान में….
जोगी रे क्या जादू है तुम्हरे प्यार में…..

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