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8 आदतों से सुधारें अपना तन-मन और घर |


आदत सुधारें

आदत सुधारें

व्यक्ति अपने जीवन में सुख – दुःख सब कुछ प्राप्त करता है, परन्तु क्या कभी इस बात पर विचार करता है कि उसकी आदतें भी कई बार उसके सुख दुःख में सहभागी बनती हैं | इसके लिए आपको मालूम हो कि वो ऐसी कौन सी बातें हैं जिनका आपको ख्याल रखना चाहिए, हम यहाँ आपकी सहूलियत के लिए वर्णन कर रहे हैं |

१) 👉::
अगर आपको कहीं पर भी थूकने की आदत है तो यह निश्चित है कि आपको यश, सम्मान अगर मुश्किल से मिल भी जाता है, तो कभी टिकेगा ही नहीं  | वोश बेसिन में ही यह काम कर आया करें तो उचित रहेगा !
२) 👉::
जिन लोगों को अपनी जूठी थाली या बर्तन वहीं उसी जगह पर छोड़ने की आदत होती है उनको सफलता कभी भी स्थायी रूप से नहीं मिलती !
बहुत मेहनत करनी पड़ती है और ऐसे लोग अच्छा नाम नहीं कमा पाते ! अगर आप अपने जूठे बर्तनों को उठाकर उनकी सही जगह पर रख आते हैं तो चन्द्रमा और शनि का आप सम्मान करते हैं !
३) 👉::
जब भी हमारे घर पर कोई भी बाहर से आये, चाहे मेहमान हो या कोई काम करने वाला, उसे स्वच्छ पानी जरुर पिलाएं ! ऐसा करने से हम राहू का सम्मान करते हैं ! जो लोग बाहर से आने वाले लोगों को स्वच्छ पानी हमेशा पिलाते हैं उनके घर में कभी भी राहू का दुष्प्रभाव नहीं पड़ता !
४) 👉::
घर के पौधे आपके अपने परिवार के सदस्यों जैसे ही होते हैं, उन्हें भी प्यार और थोड़ी देखभाल की जरुरत होती है ! जिस घर में सुबह-शाम पौधों को पानी दिया जाता है तो हम बुध, सूर्य और चन्द्रमा का सम्मान करते हुए परेशानियों से डटकर लड़ पाते हैं.! जो लोग नियमित रूप से पौधों को पानी देते हैं, उन लोगों को depression, anxiety जैसी परेशानियाँ जल्दी से नहीं पकड़ पातीं.!
५) 👉::
जो लोग बाहर से आकर अपने चप्पल, जूते, मोज़े इधर-उधर फैंक देते, उन्हें उनके शत्रु बड़ा परेशान करते हैं.! इससे बचने के लिए अपने चप्पल-जूते करीने से लगाकर रखें,आपकी प्रतिष्ठा बनी रहेगी |
६) 👉::
उन लोगों का राहू और शनि खराब होगा, जो लोग जब भी अपना बिस्तर छोड़ेंगे तो उनका बिस्तर हमेशा फैला हुआ होगा, सिलवटें ज्यादा होंगी, चादर कहीं, तकिया कहीं, कम्बल कहीं ? उसपर ऐसे लोग अपने पुराने पहने हुए कपडे तक फैला कर रखते ! ऐसे लोगों की पूरी दिनचर्या कभी भी व्यवस्थित नहीं रहती, जिसकी वजह से वे खुद भी परेशान रहते हैं और दूसरों को भी परेशान करते हैं.! इससे बचने के लिए उठते ही स्वयं अपना बिस्तर समेट दें.!
७)👉::
पैरों की सफाई पर हम लोगों को हर वक्त ख़ास ध्यान देना चाहिए, जो कि हम में से बहुत सारे लोग भूल जाते हैं ! नहाते समय अपने पैरों को अच्छी तरह से धोयें, कभी भी बाहर से आयें तो पांच मिनट रुक कर मुँह और पैर धोयें.! आप खुद यह पाएंगे कि आपका चिड़चिड़ापन कम होगा, दिमाग की शक्ति बढेगी और क्रोध धीरे-धीरे कम होने लगेगा.!
८) 👉::
रोज़ खाली हाथ घर लौटने पर धीरे-धीरे उस घर से लक्ष्मी चली जाती है और उस घर के सदस्यों में नकारात्मक या निराशा के भाव आने लगते हैं.!
इसके विपरित घर लौटते समय कुछ न कुछ वस्तु लेकर आएं तो उससे घर में बरकत बनी रहती है.! उस घर में लक्ष्मी का वास होता जाता है.!
हर रोज घर में कुछ न कुछ लेकर आना वृद्धि का सूचक माना गया है.! ऐसे घर में सुख, समृद्धि और धन हमेशा बढ़ता जाता है और घर में रहने वाले सदस्यों की भी तरक्की होती है.!

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जीवन में संघर्ष का महत्व |


एक बार एक किसान परमात्मा से बड़ा नाराज हो गया ! कभी बाढ़ आ जाये, कभी सूखा पड़ जाए, कभी धूप बहुत तेज हो जाए तो कभी ओले पड़ जाये ! हर बार कुछ ना कुछ कारण से उसकी फसल थोड़ी ख़राब हो जाये !

एक दिन बड़ा तंग आ कर उसने परमात्मा से कहा, “देखिये प्रभु, आप परमात्मा हैं ,लेकिन लगता है आपको खेती बाड़ी की ज्यादा जानकारी नहीं है | एक प्रार्थना है कि एक साल मुझे मौका दीजिये , जैसा मैं चाहूँ वैसा मौसम हो, फिर आप देखना मैं कैसे अन्न के भण्डार भर दूंगा !”

परमात्मा मुस्कुराये और कहा, “ठीक है, जैसा तुम कहोगे वैसा ही मौसम दूंगा, मै दखल नहीं करूँगा !”

किसान ने गेहूं की फ़सल बोई ,जब धूप चाही, तब धूप मिली, जब पानी चाहा, तब पानी मिला ! तेज धूप, ओले, बाढ़, आंधी तो उसने आने ही नहीं दी; समय के साथ फसल बढ़ी और किसान की ख़ुशी भी क्योंकि ऐसी फसल तो आज तक नहीं हुई थी !

किसान ने मन ही मन सोचा अब पता चलेगा परमात्मा को कि फ़सल कैसे करते हैं, बेकार ही इतने बरस हम किसानों को परेशान करते रहे | फ़सल काटने का समय भी आया…..

किसान बड़े गर्व से फ़सल काटने गया | लेकिन जैसे ही फसल काटने लगा, एकदम से छाती पर हाथ रख कर बैठ गया | गेहूं की एक भी बाली के अन्दर गेहूं नहीं था, सारी बालियाँ अन्दर से खाली थी !

बड़ा दुखी होकर उसने परमात्मा से कहा, “प्रभु ये क्या हुआ ?”

तब परमात्मा बोले, “ये तो होना ही था | तुमने पौधों को संघर्ष का ज़रा सा भी मौका नहीं दिया | ना तेज धूप में उनको तपने दिया, ना आंधी ओलों से जूझने दिया, उनको किसी प्रकार की चुनौती का अहसास जरा भी नहीं होने दिया, इसीलिए सब पौधे खोखले रह गए……

जब आंधी आती है, तेज बारिश होती है, ओले गिरते हैं; तब पोधा अपने बल से ही खड़ा रहता है, वो अपना अस्तित्व बचाने का संघर्ष करता है और इस संघर्ष से जो बल पैदा होता है वो ही उसे शक्ति देता है, ऊर्जा देता है, उसकी जीवटता को उभारता है | सोने को भी कुंदन बनने के लिए आग में तपने, हथौड़ी से पिटने, गलने जैसी चुनौतियों से गुजरना पड़ता है; तभी उसकी स्वर्णिम आभा उभरती है, उसे अनमोल बनाती है !”

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उसी तरह जिंदगी में भी अगर संघर्ष ना हो, चुनौती ना हो तो आदमी खोखला ही रह जाता है, उसके अन्दर कोई गुण नहीं आ पाता | ये चुनौतियाँ ही हैं जो आदमी रूपी तलवार को धार देती हैं, उसे सशक्त और प्रखर बनाती हैं | अगर प्रतिभाशाली बनना है तो चुनौतियाँ तो स्वीकार करनी ही पड़ेंगी, अन्यथा हम खोखले ही रह जायेंगे |

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अगर जिंदगी में प्रखर बनना है, प्रतिभाशाली बनना है, तो संघर्ष और चुनौतियों का सामना तो करना ही पड़ेगा |

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