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धर्म धुरंधर महा पुरुष – इनको जानोगे को आंखो से लाल आंसू बहेंगे


Swami_Vivekananda

देश को तोड़ने की साजिश वालो के साथ पैसे की लालच पर बिकाऊ ना बने |

ये वेदेशी लोग आपको भी भुन डालेंगे , कैसे, आप कल्पना भी नहीं कर पाओगे !

महा दुर्भाग्य मत करो संतों को तोड़ने का …

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संत वाणी, सनातन संस्कृति, Janmotsav

जन्मदिन कैसे मनायें …


बच्चों को अपना जन्मदिन मनाने का बड़ा शौक होता है और उनमें उस दिन बड़ा उत्साह होता है लेकिन अपनी परतंत्र मानसिकता के कारण हम उस दिन भी बच्चे के दिमाग पर अंग्रजियत की छाप छोड़कर अपने साथ, उनके साथ व देश तथा संस्कृति के साथ बड़ा अन्याय कर रहे हैं.

बच्चों के जन्मदिन पर हम केक बनवाते हैं तथा बच्चे को जितने वर्ष हुए हों उतनी मोमबत्तियाँ केक पर लगवाते हैं। उनको जलाकर फिर फूँक मारकर बुझा देते हैं।

ज़रा विचार तो कीजिए के हम कैसी उल्टी गंगा बहा रहे हैं! जहाँ दीये जलाने चाहिए वहाँ बुझा रहे हैं। जहाँ शुद्ध चीज़ खानी चाहिए वहीं फूँक मारकर उड़े हुए थूक से जूठे बने हुए केक को हम बड़े चाव से खाते हैं! जहाँ हमें गरीबों को अन्न खिलाना चाहिए वहीं हम बड़ी पार्टियों का आयोजन कर व्यर्थ पैसा उड़ा रहे हैं! कैसा विचित्र है आज का हमारा समाज?

हमें चाहिए कि हम बच्चों को उनके जन्मदिन पर भारतीय संस्कार व पद्धति के अनुसार ही कार्य करना सिखाएँ ताकि इन मासूम को हम अंग्रेज न बनाकर सम्माननीय भारतीय नागरिक बनायें।

  1. मान लो, किसी बच्चे का 11 वाँ जन्मदिन है तो थोड़े-से अक्षत् (चावल) लेकर उन्हें हल्दी, कुंकुम, गुलाल, सिंदूर आदि मांगलिक द्रव्यों से रंग ले एवं उनसे स्वस्तिक बना लें। उस स्वस्तिक पर 11 छोटे-छोटे दीये रख दें और 12 वें वर्ष की शुरूआत के प्रतीकरूप एक बड़ा दीया रख दें। फिर घर के बड़े सदस्यों से सब दीये जलवायें एवं बड़ों को प्रणाम करके उनका आशीर्वाद ग्रहण करें।
  2. पार्टियों में फालतू का खर्च करने के बजाए बच्चों के हाथों से गरीबों में, अनाथालयों में भोजन, वस्त्रादि का वितरण करवाकर अपने धन को सत्कर्म में लगाने के सुसंस्कार सुदृढ़ करें।
  3. लोगों के पास से चीज-वस्तुएँ लेने के बजाए हम अपने बच्चों के हाथों दान करवाना सिखाएँ ताकि उनमें लेने की वृत्ति नहीं अपितु देने की वृत्ति को बल मिले।
  4. हमें बच्चों से नये कार्य करवाकर उनमें देशहित की भावना का संचार करना चाहिए। जैसे, पेड़-पौधे लगवाना इत्यादि।
  5. बच्चों को इस दिन अपने गत वर्ष का हिसाब करना चाहिए यानि कि उन्होंने वर्ष भर में क्या-क्या अच्छे काम किये? क्या-क्या बुरे काम किये? जो अच्छे कार्य किये उन्हें भगवान के चरणों में अर्पण करना चाहिए एवं जो बुरे कार्य हुए उनको भूलकर आगे उसे न दोहराने व सन्मार्ग पर चलने का संकल्प करना चाहिए।
  6. उनसे संकल्प करवाना चाहिए कि वे नए वर्ष में पढ़ाई, साधना, सत्कर्म, सच्चाई तथा ईमानदारी में आगे बढ़कर अपने माता-पिता व देश के गौरव को बढ़ायेंगे।

उपरोक्त सिद्धान्तों के अनुसार अगर हम बच्चों के जन्मदिन को मनाते हैं तो जरूर समझ लें कि हम कदाचित् उन्हें भौतिक रूप से भले ही कुछ न दे पायें लेकिन इन संस्कारों से ही हम उन्हें महान बना सकते हैं। उन्हें ऐसे महकते फूल बना सकते हैं कि अपनी सुवास से वे केवल अपना घर, पड़ोस, शहर, राज्य व देश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व को सुवासित कर सकेंगे।

 

[youtube https://www.youtube.com/watch?v=2A84mhaGDeg]

 

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विचार विमर्श, संत वाणी, सनातन संस्कृति, Guru Vani

धर्मो रक्षति रक्षितः – पूज्य बापूजी की अमृतवाणी


 

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जो धर्म का हनन करता है, धर्म उसका ही नाश कर देता है ! और जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है ! पर धर्म है क्या ?

आइये सुनते हैं बापूजी धर्म के बारे में क्या बताते हैं :

धर्म वही है जो आपको ऊपर उठने की प्रेरणा दे, और जहाँ आज हैं, वहां से नीचे न गिरें बल्कि ऊपर उठते जायें ! इसी व्यवस्था का नाम धर्म है !

 

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Japa, Mantra, Meditation, Occasion, Tithis

Special occasion for Japa and meditation : Ravipushyamrit Yoga


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Today is Ravipushyamrit Yoga, performing recitation and meditation will bear thousands times more virtues.
Performing recitation and meditation today (timing October 27, 2013 sunrise  to 7:14 pm IST October 27, 2013) bear thousands times more virtues, similar to the benefits of performing them during a solar/lunar eclipse. All Japa, Donations, Medications and other good deeds are considered to have multiple and better benefits. So, we should take advantage of today so that we can earn more virtues with minimal effort.

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Indian Culture

Indian Culture (भारतीय संस्कृति)


india-culture

यही है हमारी संस्कृति की पहचान. हमारी शान हिंदुस्तान !

(1). हम सब एक है |
(2). दो पक्ष- कृष्ण पक्ष , शुक्ल पक्ष !
(3). तीन ऋण – देव ऋण , पितृ ऋण , ऋषि ऋण !
(4). चार युग – सतयुग , त्रेतायुग ,द्वापरयुग , कलियुग !
चार धाम – द्वारिका , बद्रीनाथ , जगन्नाथ पूरी , रामेश्वरम धाम !
चारपीठ -शारदा पीठ ( द्वारिका ), ज्योतिष पीठ ( जोशीमठ बद्रिधाम ) , गोवर्धन पीठ ( जगन्नाथपुरी ) , श्रन्गेरिपीठ !
चार वेद- ऋग्वेद , अथर्वेद , यजुर्वेद , सामवेद !
चार आश्रम -ब्रह्मचर्य , गृहस्थ , वानप्रस्थ , संन्यास !
चार अंतःकरण -मन , बुद्धि , चित्त , अहंकार !
(5). पञ्च गव्य – गाय का घी , दूध , दही ,गोमूत्र , गोबर !
पञ्च देव – गणेश , विष्णु , शिव , देवी ,सूर्य !
पंच तत्त्व – पृथ्वी , जल , अग्नि , वायु , आकाश !
(6).  छह दर्शन – वैशेषिक , न्याय , सांख्य ,योग , पूर्व मिसांसा , दक्षिण मिसांसा !
(7).  सप्त ऋषि – विश्वामित्र , जमदाग्नि ,भरद्वाज , गौतम , अत्री , वशिष्ठ और कश्यप!
सप्त पूरी -अयोध्या पूरी ,मथुरा पूरी , माया पूरी ( हरिद्वार ) , काशी ,कांची ( शिन कांची – विष्णु कांची ) , अवंतिका और द्वारिका पूरी !
(8).  आठ योग – यम , नियम , आसन ,प्राणायाम , प्रत्याहार , धारणा , ध्यान एवं समाधी !
आठ लक्ष्मी – आग्घ ,विद्या , सौभाग्य ,अमृत , काम , सत्य , भोग ,एवं योग लक्ष्मी !
(9).  नव दुर्गा — शैल पुत्री , ब्रह्मचारिणी ,चंद्रघंटा , कुष्मांडा , स्कंदमाता , कात्यायिनी ,कालरात्रि , महागौरी एवं सिद्धिदात्री !
(10.  दस दिशाएं – पूर्व , पश्चिम , उत्तर , दक्षिण ,इशान , नेऋत्य , वायव्य , अग्नि , आकाश एवं पाताल !
(11).   मुख्य ११ अवतार – मत्स्य , कच्छप , वराह ,नरसिंह , वामन , परशुराम ,श्री राम , कृष्ण , बलराम , बुद्ध , एवं कल्कि !
(12)  बारह मास – चेत्र , वैशाख , ज्येष्ठ ,अषाढ , श्रावण , भाद्रपद , अश्विन , कार्तिक ,मार्गशीर्ष , पौष , माघ , फागुन !
बारह राशी – मेष , वृषभ , मिथुन ,कर्क , सिंह , कन्या , तुला , वृश्चिक , धनु , मकर , कुंभ , कन्या !
बारह ज्योतिर्लिंग – सोमनाथ , मल्लिकार्जुन ,महाकाल , ओमकारेश्वर , बैजनाथ , रामेश्वरम ,विश्वनाथ , त्र्यंबकेश्वर , केदारनाथ , घुष्नेश्वर ,भीमाशंकर ,नागेश्वर !
(13). सब कुछ तेरा तेरा तेरा

(14). चौदह भुवन
(15). पंद्रह तिथियाँ – प्रतिपदा ,द्वितीय , तृतीय , चतुर्थी , पंचमी , षष्ठी , सप्तमी , अष्टमी ,नवमी ,दशमी , एकादशी , द्वादशी , त्रयोदशी , चतुर्दशी , पूर्णिमा , अमावष्या !
भारतीय संस्कृति की स्मृतियां – मनु , विष्णु , अत्री , हारीत , याज्ञवल्क्य , उशना , अंगीरा , यम , आपस्तम्ब , सर्वत ,कात्यायन , ब्रहस्पति , पराशर , व्यास , शांख्य, लिखित , दक्ष , शातातप , वशिष्ठ !

आओ सभी भारतीय भाई बहन मिलके इस संस्कृति की रक्षा के लिए एक झूट होकर सच्चाई  का साथ दे ।

ॐ शाति ।। जय हिन्द ।। जय संस्कृत ।। जय भारत ।। वंदे मातरम् ।।

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