
राजा भरथरी का वैराग्य शतक: सांसारिक मोह-माया से मुक्ति की प्रेरणा :
राजा भरथरी राजा भर्तृहरि के नाम से भी पहेचाने जाते है । राजा भरथरी का “वैराग्य शतक” भारतीय साहित्य का एक ऐसा अनुपम रत्न है, जिसमें सांसारिक मोह-माया और भौतिक सुखों की अस्थिरता को समझाते हुए वैराग्य का महत्व बताया गया है। इस शतक में सौ श्लोकों का संग्रह है, जो मनुष्य को जीवन के सच्चे अर्थ और परमात्मा की ओर प्रेरित करता है। आइए इस काव्य के प्रमुख संदेशों को सरल शब्दों में समझते हैं।
- संसार की नश्वरता :
राजा भरथरी ने अपने श्लोकों में यह समझाया है कि संसार के सभी सुख-दुख, रिश्ते-नाते, धन-दौलत और यश क्षणभंगुर हैं। इन पर अत्यधिक आसक्ति करना व्यर्थ है, क्योंकि अंत में सब कुछ नष्ट हो जाता है।
उदाहरण:
“यह संसार एक सपने की तरह है। जैसे सपना टूटते ही सब समाप्त हो जाता है, वैसे ही जीवन भी अनित्य (अस्थाई) है।”
- मोह-माया से मुक्ति :
भरथरी ने यह सिखाया कि मोह और माया मनुष्य को अपने कर्तव्यों और जीवन के वास्तविक उद्देश्य से भटकाते हैं। उन्होंने हमें अपने मन को इन बंधनों से मुक्त करने की प्रेरणा दी।
संदेश:
“जो व्यक्ति मोह के जाल से मुक्त हो जाता है, वही सच्चा सुख और शांति प्राप्त कर सकता है।”
- धन और यश का अस्थायित्व
भरथरी के अनुसार, धन और यश किसी के स्थायी साथी नहीं होते। ये चीजें आज किसी के पास हैं तो कल किसी और के पास चली जाती हैं। इन पर अहंकार करना व्यर्थ है।
विचार:
“धन नाशवान है, और यश केवल समय के साथ फीका पड़ जाता है। स्थायी तो केवल आत्मा और परमात्मा का ज्ञान है।”
- वैराग्य अपनाने की प्रेरणा
भरथरी ने वैराग्य को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया है। वैराग्य का अर्थ है, सांसारिक चीजों से मन हटाकर आध्यात्मिक पथ पर चलना। इसका मतलब संसार से भागना नहीं, बल्कि उसके असली स्वरूप को समझना है।
प्रेरणा:
“वैराग्य वह अवस्था है, जब मनुष्य अपने मन को शांत कर लेता है और आत्मा का साक्षात्कार करता है।”
- परमात्मा का स्मरण
“वैराग्य शतक” में बताया गया है कि सच्चा सुख केवल परमात्मा की भक्ति और ज्ञान में है। सांसारिक चीजें केवल मन को भटकाती हैं और असली आनंद से दूर करती हैं।
शिक्षा:
“जो व्यक्ति परमात्मा को समझ लेता है, वह संसार के बंधनों से मुक्त हो जाता है।”
निष्कर्ष
भरथरी का “वैराग्य शतक” हमें यह सिखाता है कि सांसारिक मोह-माया और भौतिक सुखों में पड़कर हम अपने जीवन के असली उद्देश्य को भूल जाते हैं। उन्होंने आत्मा, परमात्मा और वैराग्य को जीवन का मार्गदर्शन बताया। इस ग्रंथ में भक्ति, ज्ञान और ध्यान का महत्व प्रमुख रूप से उभारा गया है।
“वैराग्य शतक” सिर्फ एक काव्य नहीं, बल्कि जीवन को समझने और उसके सही अर्थ तक पहुंचने की राह दिखाने वाला मार्गदर्शक है। इसे पढ़कर हमें अपने जीवन के उद्देश्य और आत्मा की शुद्धि पर विचार करने की प्रेरणा मिलती है।
You must be logged in to post a comment.