बाल संस्कार केंद्र

Do you want this?



आज के दिन की अनंत महिमा
सर्व मनोइच्छित पूर्ण कारक।
सर्व पाप कर्मो को क्षय करने में समर्थ।
त्रिमूर्ति विजय अमृतसिद्धि योग।

जिनशासन में साधना,जाप आदि अनुष्ठानो का विशिष्ट महत्व बताया गया है
ऐसा ही एक शुभ दिन आज है
श्रावण सूद – १,
तारीख – २७-७-२०१४, रविवार

७० साल बाद ऐसा शुभ दिन आ रहा है।
ज्योतिष शास्त्र की नजर से महत्व –
इस दिन सूर्य, चन्द्र, गुरु, पुष्य नक्षत्र और रविवार का मिलन हो रहा है।
तमाम २७ नक्षत्र में पुष्य सब से शुभ और लाभदायी माना जाता है ।
गुरु पुष्य में १३ साल में एक बार आता है और वो भी कब किस महीने आये वो निश्चित नहीं होता, जब आता है तब गुरुवार या रविवार इन दो शुभ दिनों में कभी कभी ही आता है।
लेकिन जब भी मिल जाये उस दिन की गई धर्माराधना बहोत ही फलदायी होती हे
और हमारे सदनसीब से ऐसा शुभ दिन आज ही है तो इस दिन ज़्यादा से ज़्यादा धर्म क्रिया करे और मन्त्र जाप करे –

विशेष महत्व :
💥इस दिन जिसका जन्म होता हे वो युगपुरुष बन शकता है ,
💥इस योग में शुरू किये गए तमाम नये कार्य सफल बनते है ,
💥इस दिन किये गए जाप, अनुष्ठान, तप आदि सिद्ध होते है ,
💥इस दिन किया गया दान, गौ सेवा यात्रा आदि धर्मक्रिया से अनेक कर्मो का क्षय होता हे,

इस दिन शादी विवाह आदि सांसारिक कार्य नहीं करने चाहिए

तो इस महान योग का लाभ ले और ज़्यादा से ज़्यादा धर्म क्रिया करे।
जिससे आपके कर्मो का क्षय हो और जीवन सुख शांति धर्ममय बने। सभी साधक भाई-बहेन ईस योग का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाये पूज्य बापूजी की शीघ्र रिहाई एवं स्वास्थ के लिए अधिक-अधिक जप-ध्यान द्रढ़ संकल्प करके करे। हो सके तो मौन और उपवास का भी लाभ ले के जप-ध्यान करे।
जिसके मुख में गुरुमंत्र है उसके सब कर्म सिद्ध होते हैं, दूसरे के नहीं


Like · Reply · 4 hours ago

Standard

Lal Bahadur Shastri Jayanti – 2nd October.


Mahatma Gandhi Jayanti – 2nd October.

asaram bapuji

De-addiction Day ( नशा-मुक्ति दिवस )

व्यसन की शुरुआत पान या मसाले से होती है, इनसे बचिए। शौक या फैशन के नाम पर अपने घर-परिवार को बरबाद न करें। अपने मन को याद दिलाते रहें कि मुझे देखकर बच्चे भी नशा करना सीखेंगे। इसके धुएं से वे भी कैंसर के शिकार हो सकते हैं। यज्ञ, पर्व या सत्संग में दृढ़ संकल्प करके वहीं पर व्यसन छोड़ दें। अपने व्यसन मुक्ति के दृढ़ संकल्प को अपने मित्रों व संबंध संपर्क में गर्व के साथ घोषित करें। दृढ़ इच्छा शक्ति के नशे के त्याग का संकल्प लें व पुन: प्रारंभ करने के बहाने न बनाएं। एक नशा छोड़कर दूसरा नशा न अपनाएं। नित्य एक-एक बीड़ी या सिगरेट कम करते हुए इसे छोड़ सकते हैं। दृढ़ संकल्प के धनी एक ही बार में इसे हमेशा के लिए छोड़ सकते हैं।लाखों लोग नशा छोड़ चुके हैं। आप भी छोड़िए और सात्विक बनिए। जल्दी सुधरे, देर होने पर सुधार की गुंजाइश कम हो जाती है। चाय, काफी आदि से बचें। चाय, कॉफी में जौ कैफीन होता है, वह धूम्रपान की तलब बढ़ाता है।

Link