ब्रह्मज्ञानी सदा निर्लेपा
है रामजी , जब ऐसे धर्मात्मा को विवेक रूपी दीपक से आत्मा रूपी मणि मिलता है तब उसकी उचाई सुमेरु और समुद्र और आकाश से भी अधिक हो जाती है …
संसारी वो होता है जो साधना थोड़ी बहोत करता है और संसार की परिस्थिति में उलजता हे ….
साधक उसको कहते है जो इश्वर को पाने के लिए साधना करता है |
जिसने अपनी आत्मा में स्थिति की है वो महापुरुष है उसको मेरा नमस्कार है |
ठग लो उनको वे ठगवाने के लिए तो घूमते रहते है, उनके अनुभव को अपना अनुभव बना लो…

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