Festival, Special Day, Special Tithi

महाशिवरात्रि


महाशिवरात्रि भगवान शिव की आराधना और आत्मशुद्धि का पर्व है। इस दिन व्रत, ध्यान और "ॐ नमः शिवाय" मंत्र जाप से आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। शिवलिंग अभिषेक, रात्रि जागरण और शिवकथा सुनने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। शिव परिवार का प्रतीकात्मक संदेश समरसता, संतुलन और साधना को दर्शाता है। इस शुभ अवसर पर शिवभक्ति से जीवन में नई चेतना और शक्ति का संचार करें। हर-हर महादेव!

ॐ नमः शिवाय और महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि एक महत्वपूर्ण हिन्दू पर्व है, जो भगवान शिव की आराधना और आध्यात्मिक उन्नति के लिए समर्पित है। इस पावन रात्रि में शिव जी की भक्ति करने से आत्मशुद्धि, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

महाशिवरात्रि और “बम” बीज मंत्र

“बम” शब्द बीज मंत्र है – शिवरात्रि की रात को सवा लाख जप करने से वायु दोष, गठिया बीमारी, मानसिक तनाव आदि दूर हो जाते हैं। शिवरात्रि के दिन “बम बम भोले” का जाप करने से वायु संबंधी बीमारियां समाप्त हो जाती हैं और व्यक्ति की ऊर्जा संतुलित होती है।

ग्रह-नक्षत्रों का योग और आध्यात्मिक प्रभाव :

फाल्गुन मास की अमावस्या को ग्रह नक्षत्रों का विशेष संयोग बनता है, जिससे इस दिन की ऊर्जा अन्य दिनों की अपेक्षा अधिक शक्तिशाली होती है। यह दिन ध्यान, साधना, और भक्ति के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। शिवरात्रि के दिन उपवास और संयम रखने से व्यक्ति का मन और बुद्धि उच्च आध्यात्मिक स्तर पर पहुँचते हैं।

संयम और शिव आराधना का महत्व :

ॐ नमः शिवाय का जाप और संयम रखने से आध्यात्मिक कल्याण होता है। शिवरात्रि का प्रभाव हमारे मन, बुद्धि, और चित्त पर पड़ता है। इस दिन पति-पत्नी को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए, क्योंकि इस दिन सांसारिक कर्म करने से नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न हो सकती है, जिससे जीवन में हताशा, निराशा, और आत्महत्या के विचार उत्पन्न हो सकते हैं।

सनातन संस्कृति की महिमा :

चार प्रमुख प्राचीन संस्कृतियां हैं – मिश्र की संस्कृति, प्राचीन रोम की संस्कृति, चीन की संस्कृति और हिंदुस्तान की सनातन संस्कृति। लेकिन जहां अन्य संस्कृतियाँ विलुप्त हो गईं, वहीं भारतीय सनातन संस्कृति आज भी जीवित है। शिवालयों में आज भी लाखों करोड़ों श्रद्धालु ॐ नमः शिवाय का जाप करते हैं, जिससे भारतीय संस्कृति की जीवंतता का प्रमाण मिलता है।

शिव जी की उपासना और प्रतीकात्मकता :

भगवान शिव को व्यसन भंग का नहीं, बल्कि भुवन भंग का व्यसन है। शिव सृष्टि के ऐसे माली हैं, जो कभी-कभी उथल-पुथल मचाकर नए और सुंदर जगत की रचना करते हैं। शिव जी का वेशभूषा हमें जीवन के गहरे संदेश देती है:

मुंडों की माला – इसका अर्थ है, वे उन्हीं को स्वीकारते हैं जिनके मस्तक में भगवत ज्ञान का प्रकाश हो।

गले में सर्प – यह जीवन की अस्थिरता और माया का प्रतीक है।

शमशान की राख – हमें यह सिखाती है कि यह शरीर नश्वर है और अहंकार त्यागना चाहिए।

त्रिशूल – यह तीन प्रकार के कष्ट (आधिदैविक, आधिभौतिक, आध्यात्मिक) को दूर करने का प्रतीक है।

कैलाश पर निवास – यह ऊँचे आध्यात्मिक स्तर और मन की स्थिरता को दर्शाता है।

शिव परिवार से जीवन के संदेश :

भगवान शिव का पूरा परिवार हमें जीवन में समता, सहिष्णुता और संतुलन बनाए रखने का संदेश देता है।

शिव जी का वाहन बैल और पार्वती जी का वाहन सिंह – जो प्राकृतिक रूप से शत्रु होते हैं, लेकिन शिव के पास प्रेम और संतुलन में रहते हैं।

गणपति का वाहन चूहा और कार्तिकेय का वाहन मोर – ये एक-दूसरे के स्वाभाविक शत्रु हैं, फिर भी शिव परिवार में समरसता से रहते हैं।

महाशिवरात्रि की पूजन विधि :

व्रत और उपवास – पूरे दिन उपवास रखें या गाय का दूध, सेव फल या अंगूर लें।

शिवलिंग अभिषेक – जल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र और गंगाजल से अभिषेक करें।

ॐ नमः शिवाय का जाप – कम से कम 108 बार जाप करें।

रात्रि जागरण – पूरी रात जागकर शिव कथा, मंत्र जाप और ध्यान करें।

बिल्वपत्र चढ़ाना – बिल्वपत्र शिव जी को अत्यंत प्रिय हैं और यह वायु दोष को दूर करता है।

शिवरात्रि के चार प्रमुख रात्रियाँ :

महाशिवरात्रि – यह “अहोरात्रि” कहलाती है।

जन्माष्टमी – इसे “मोहरात्रि” कहा जाता है।

होली – यह “दारुणरात्रि” के रूप में जानी जाती है।

काली चौदस – इसे “कालरात्रि” कहते हैं।

इन चार रात्रियों में ध्यान, संयम और आध्यात्मिक साधना करने से व्यक्ति के मन और बुद्धि का स्तर उच्च केंद्रों पर पहुँच जाता है और जीवन में शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

ॐकार और शिव भक्ति का प्रभाव :

ॐ नमः शिवाय का जाप इच्छित वस्तु को प्राप्त करने और आत्मिक उन्नति के लिए सर्वोत्तम माना गया है।

रोज 108 बार ॐकार जप करने से ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है।

दुगुना जप करने वाले को विष्णु पद की प्राप्ति होती है।

तिगुना जप करने वाला साक्षात शिव तत्व में लीन हो जाता है।

आरती और मंदिर दर्शन का महत्व :

मंदिर में प्रवेश कर हाथ ऊपर उठाने से मन और प्राण उच्च स्तर पर जाते हैं। घंटा बजाने से नकारात्मक विचार शांत हो जाते हैं और सद्भावना का संचार होता है। शिव पूजा में प्रयुक्त प्रत्येक वस्तु का विशेष आध्यात्मिक महत्व है।

निष्कर्ष :

महाशिवरात्रि का यह पावन पर्व आत्मशुद्धि, भक्ति, और ध्यान के लिए एक सुनहरा अवसर है। शिवरात्रि के दिन संयम, पूजा और मंत्र जाप करने से आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

महाशिवरात्रि व्रत : 26 फरवरी
निशीथकाल
(रात्रि 12:15 से 1:04 तक)
(प्रहर :- प्रथम : शाम 6:29 से, द्वितीय : रात्रि 9:34 से, तृतीय : मध्यरात्रि 12:39 से, चतुर्थ : 27 फरवरी प्रातः 3:45 से) (पारणा : 27 फरवरी)

आओ, इस महाशिवरात्रि पर ॐ नमः शिवाय का जाप करें और अपने जीवन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दें।

ॐ नमः शिवाय।

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मातृ-पितृ पूजन दिवस, Parent's Worship Day

How hindu culture celebrates Parent’s worship day



The conch should be blown first.

The Inspiration Behind Matri-Pitri Pujan Divas (MPPD)

Matri-Pitri Pujan Divas (MPPD) finds its inspiration in Asaram Bapu, a renowned spiritual leader in India. He initiated this observance in 2007 as an alternative to Valentine’s Day, with the objective of fostering respect and gratitude towards parents.

Key Points About the Inspiration:

  • Founder: Asaram Bapu
  • Year Established: 2007
  • Purpose: To encourage the younger generation to honor and appreciate their parents, emphasizing the importance of familial bonds and respect.

Significance of Matri-Pitri Pujan Divas

This day serves as a poignant reminder of the sacrifices parents make and the love and guidance they provide. It promotes a culture of gratitude, respect, and strong family values, reinforcing the essential role of parents in shaping the lives of their children.

Asana Method:

First, seat the parents on a clean and auspicious seat.
Asana Shloka: “Asana sthapite hyatra pujartham bhavarohitham. Bhavanthu samsthithau tathau puryataam manoharah.”
“आसने स्थापिते ह्यत्र पूजार्थं भवरोरिह ।भवन्तौ संस्थितौ तातौ पूर्यतां मे मनोरथः ।।”

Tilak Method:

The sons and daughters should apply kumkum tilak on the foreheads of their parents.
Tilak Shloka: “Svasti na indro vrddhashravaha svasti nah pusa visvavedah svasti nastarkshyo arishtanemiha svasti no brahaspatir dadhatu.”
ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः । स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः । स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः । स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु ॥”

Flower Offering Method:

Place flowers and akshat on the heads of the parents and adorn them with garlands.

Parikrama Method:

Just as Lord Ganesha received the boon of being worshipped first by circumambulating his father Lord Shiva and mother Parvati seven times, we too should receive the boon of being worshipped first by circumambulating our parents seven times.

Pranam Method:

Offer proper pranam to the parents.
Pranam Shloka: “Abhivadanasilasya nityam vrddhopasevinah. Tasyavardhanam ayuryaso balam ayuryaso balam.”
“अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः ।चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम् ।।”

Deep Prajwalan Shloka:

“Deepajyotih prabrahma deepajyotir yajanardanah. Deepo haratu me papam deepo me haratu me papam.”
“दीपज्योतिः परब्रह्म दीपज्योतिर्जनार्दनः ।दीपो हरतु मे पापं दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते ॥”

Aarti Method:

Light a lamp in a plate and perform aarti for the parents.

Tilak Method for Children:

Now, the parents, overwhelmed with emotion, should apply tilak on the foreheads of their children. Then, with affection, they should place flowers and akshat on the heads of their children.

Sankalp Method:

The sons and daughters, with folded hands, should gaze at their parents and make a sacred vow: “I will respect my parents and teachers. In this life, which will lead me on the path of the great souls, I will strive to attain God.”

Resolution Method:

Sons and daughters, with folded hands, looking at their parents, should make this sacred resolution:

“I will respect my parents and teachers. It is my duty to follow their commands, which will lead my life to greatness… and I will surely fulfill them.”

Distribution of Sweets:

Like every auspicious occasion, sons and daughters will sweeten the mouths of their parents, and parents will also feed their children sweet offerings.

Inspiration of Parent’s Worship Worship Day:

This sacred day, ‘Parent’s Worship Worship Day’, began with the holy inspiration of revered Saint Shri Asharamji Bapu. This is a day of awareness.

This day was brought by Saint Shri Bapu Asharam.

With the path that revered Asharam Bapu has shown to society, let us all resolve that we will continue to serve our parents and teachers. Every year on February 14th, we will celebrate Parent’s Worship Worship Day as a day of selfless love and strive to attain God in this very life with the grace of the Supreme Guru.

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#HappyParentsWorshipDay, #LovedParentsWorshipDay, मातृ-पितृ पूजन दिवस, Parent's Worship Day

People of which religion celebrate MPPD (Parents Worship Day?


Parents worship day celebrated by Muslim family
یوم عبا امّی عبادت
Parents worship day celebrated by Sikh family
ਮਾਤਾ-ਪਿਤਾ ਦੀ ਪੂਜਾ ਦਾ ਦਿਨ
Parents worship day celebrated by Christian family
Parent’s Worship Day
Parents worship day celebrated by Hindu family
मातृ-पितृ पूजन दिवस

MPPD (Matri-Pitri Pujan Divas) has several names that reflect its significance across different cultures and religions. Here’s a comprehensive list of its names:

Names of Matri-Pitri Pujan Divas:

  • MPPD
  • Matri-Pitri Pujan Divas (मातृ-पितृ पूजन दिवस)
  • Abba-Ammi Ibadat Day (अब्बा -अम्मी इबादत दिन)
  • Parent’s Worship Day

The celebration of Matri-Pitri Pujan Divas (MPPD) in Muslim schools and families highlights the universal value of honoring parents across different cultures and religions. Here’s a look at how various communities celebrate this significant day, including those within the Muslim context:

Abba-Ammi Ibadat Day

Celebrations in Different Cultures:

  1. Hindu Community
  • Rituals: Children may perform puja (worship) for their parents, which includes offerings, prayers, and sometimes rituals like washing their feet.
  • Family Gatherings: Families come together to celebrate with meals, sharing stories, and expressing gratitude.
  • Gifts: Children often give gifts or tokens of appreciation to their parents.
  1. Muslim Community
  • Respect and Gratitude: Similar to other cultures, this day emphasizes expressing love and appreciation for parents.
  • Prayer and Blessings: Muslim families might engage in prayers for their parents, asking for their well-being and guidance.
  • Acts of Service: Children may help with household chores or prepare special meals to honor their parents.
  1. Sikh Community
  • Special Services: Sikhs might organize special prayers in Gurdwaras, focusing on honoring parents and elders.
  • Community Feasts: Langar (community meals) may be prepared in honor of parents, reflecting the value of community and sharing.
  1. Christian Community
  • Family Activities: Families might participate in church services or family gatherings to express gratitude.
  • Cards and Gifts: Children might give cards, flowers, or gifts to their parents as tokens of appreciation. Common Themes Across Cultures
  • Respect: Regardless of religious background, the common theme is a deep respect and honor for parents.
  • Gratitude: Expressing gratitude for the sacrifices parents make is a universal value.
  • Family Unity: These celebrations often strengthen family bonds and foster community spirit.

It’s heartening to see how Matri-Pitri Pujan Divas transcends cultural boundaries, allowing various communities to honor their parents and elders in meaningful ways!

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ग्रहण, सत्संग

खग्रास चन्द्रग्रहण


खग्रास चन्द्रग्रहण – 8 नवम्बर 202

दिनांक 8 नवम्बर 2022, कार्तिक पूर्णिमा को खग्रास चन्द्रग्रहण है ।

यह ग्रहण पूरे भारत में दिखेगा । भारत के अलावा एशिया, आस्ट्रेलिया, पैसेफिक क्षेत्र, उत्तरी और मध्य अमेरिका में भी ग्रहण दिखेगा । जहाँ ग्रहण दिखायी देगा, वहाँ पर ग्रहण के नियम पालनीय हैं ।

आखिरी चंद्र ग्रहण 8 नवंबर 2022 को लगने जा रहा है, इससे पहले दिवाली के अगले दिन 25 अक्टूबर 2022 को साल का आखिरी सूर्य ग्रहण लगा था,सूर्य ग्रहण के सिर्फ 15 दिनों के बाद देव दीपावली के दिन 8 नवंबर 2022 को साल का ये आखिरी चंद्र ग्रहण लगेगा,साल का पहला चंद्र ग्रहण 16 मई 2022 को लगा था, 8 नवंबर को लगने वाला चंद्र ग्रहण कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि के दिन लग रहा है,साल का ये अंतिम चंद्र ग्रहण पूर्ण चंद्रग्रहण होगा।

क्या होता है पूर्ण चंद्र ग्रहण (What is Chandra Grahan?)

चंद्र ग्रहण के दौरान सूर्य की परिक्रमा के दौरान पृथ्वी, चांद और सूर्य के बीच आ जाती है,इस दौरान चांद धरती की छाया से पूरी तरह से छुप जाता है, पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक दूसरे के बिल्कुल सीध में होते हैं,इस दौरान जब हम धरती से चांद देखते हैं तो वह हमें काला नजर आता है और इसे चंद्रग्रहण कहा जाता है।

साल का आखिरी चंद्र ग्रहण 8 नवंबर 2022 को भारत में 4 बजकर 28 मिनट से दिखाई देना शुरू होगा और शाम 6 बजकर 18 मिनट पर समाप्त हो जाएगा, ऐसे में चंद्र ग्रहण का सूतक काल 8 नवम्बर को सुबह 9 से शुरू होगा और शाम के 6 बजकर 18 मिनट पर समाप्त हो जाएगा, साल का ये आखिरी चंद्र ग्रहण मेष राशि में लगेगा।

ग्रहण के दौरान किसी भी तरह की यात्रा करने से बचें।

सूतक काल के दौरान घर पर ही रहें,कोशिश करें कि ग्रहण की रोशनी आपने घर के अंदर प्रवेश ना करें।

सूर्य ग्रहण की तरह की चंद्र ग्रहण को भी नहीं देखना चाहिए।

ग्रहण से पहले और ग्रहण के बाद स्नान अवश्य करना चाहिए, कहा जाता है ऐसा करने से ग्रहण का कोई भी नकारात्मक प्रभाव नहीं रहता।

ग्रहण में क्या करें, क्या न करें ?

चन्द्रग्रहण और सूर्यग्रहण के समय संयम रखकर जप-ध्यान करने से कई गुना फल होता है। श्रेष्ठ साधक उस समय उपवासपूर्वक ब्राह्मी घृत का स्पर्श करके ”ॐ नमो नारायणाय” मंत्र का आठ हजार जप करने के पश्चात ग्रहणशुद्धि होने पर उस घृत को पी ले। ऐसा करने से वह मेधा (धारणशक्ति), कवित्वशक्ति तथा वाक् सिद्धि प्राप्त कर लेता है।

सूर्यग्रहण या चन्द्रग्रहण के समय भोजन करने वाला मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है, उतने वर्षों तक ‘अरुन्तुद’ नरक में वास करता है।

सूर्यग्रहण में ग्रहण चार प्रहर (12 घंटे) पूर्व और चन्द्र ग्रहण में तीन प्रहर (9) घंटे पूर्व भोजन नहीं करना चाहिए। बूढ़े, बालक और रोगी डेढ़ प्रहर (साढ़े चार घंटे) पूर्व तक खा सकते हैं।

ग्रहण-वेध के पहले जिन पदार्थों में कुश या तुलसी की पत्तियाँ डाल दी जाती हैं, वे पदार्थ दूषित नहीं होते। पके हुए अन्न का त्याग करके उसे गाय, कुत्ते को डालकर नया भोजन बनाना चाहिए।

ग्रहण वेध के प्रारम्भ में तिल या कुश मिश्रित जल का उपयोग भी अत्यावश्यक परिस्थिति में ही करना चाहिए और ग्रहण शुरू होने से अंत तक अन्न या जल नहीं लेना चाहिए।

ग्रहण के स्पर्श के समय स्नान, मध्य के समय होम, देव-पूजन और श्राद्ध तथा अंत में सचैल (वस्त्रसहित) स्नान करना चाहिए। स्त्रियाँ सिर धोये बिना भी स्नान कर सकती हैं।

ग्रहण पूरा होने पर सूर्य या चन्द्र, जिसका ग्रहण हो उसका शुद्ध बिम्ब देखकर भोजन करना चाहिए।

ग्रहणकाल में स्पर्श किये हुए वस्त्र आदि की शुद्धि हेतु बाद में उसे धो देना चाहिए तथा स्वयं भी वस्त्रसहित स्नान करना चाहिए।

ग्रहण के स्नान में कोई मंत्र नहीं बोलना चाहिए। ग्रहण के स्नान में गरम जल की अपेक्षा ठंडा जल, ठंडे जल में भी दूसरे के हाथ से निकाले हुए जल की अपेक्षा अपने हाथ से निकाला हुआ, निकाले हुए की अपेक्षा जमीन में भरा हुआ, भरे हुए की अपेक्षा बहता हुआ, (साधारण) बहते हुए की अपेक्षा सरोवर का, सरोवर की अपेक्षा नदी का, अन्य नदियों की अपेक्षा गंगा का और गंगा की अपेक्षा भी समुद्र का जल पवित्र माना जाता है।

ग्रहण के समय गायों को घास, पक्षियों को अन्न, जरूरतमंदों को वस्त्रदान से अनेक गुना पुण्य प्राप्त होता है।

ग्रहण के दिन पत्ते, तिनके, लकड़ी और फूल नहीं तोड़ने चाहिए। बाल तथा वस्त्र नहीं निचोड़ने चाहिए व दंतधावन नहीं करना चाहिए। ग्रहण के समय ताला खोलना, सोना, मल-मूत्र का त्याग, मैथुन और भोजन – ये सब कार्य वर्जित हैं।

ग्रहण के समय कोई भी शुभ व नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।

ग्रहण के समय सोने से रोगी, लघुशंका करने से दरिद्र, मल त्यागने से कीड़ा, स्त्री प्रसंग करने से सूअर और उबटन लगाने से व्यक्ति कोढ़ी होता है। गर्भवती महिला को ग्रहण के समय विशेष सावधान रहना चाहिए।

तीन दिन या एक दिन उपवास करके स्नान दानादि का ग्रहण में महाफल है, किन्तु संतानयुक्त गृहस्थ को ग्रहण और संक्रान्ति के दिन उपवास नहीं करना चाहिए।

भगवान वेदव्यासजी ने परम हितकारी वचन कहे हैं- ‘सामान्य दिन से चन्द्रग्रहण में किया गया पुण्यकर्म (जप, ध्यान, दान आदि) एक लाख गुना और सूर्यग्रहण में दस लाख गुना फलदायी होता है। यदि गंगाजल पास में हो तो चन्द्रग्रहण में एक करोड़ गुना और सूर्यग्रहण में दस करोड़ गुना फलदायी होता है।’

ग्रहण के समय गुरुमंत्र, इष्टमंत्र अथवा भगवन्नाम-जप अवश्य करें, न करने से मंत्र को मलिनता प्राप्त होती है।

ग्रहण के अवसर पर दूसरे का अन्न खाने से बारह वर्षों का एकत्र किया हुआ सब पुण्य नष्ट हो जाता है। (स्कन्द पुराण)

भूकंप एवं ग्रहण के अवसर पर पृथ्वी को खोदना नहीं चाहिए। (देवी भागवत)

अस्त के समय सूर्य और चन्द्रमा को रोगभय के कारण नहीं देखना चाहिए।

ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं रखें इन बातों का ख्याल (Chandra Grahan Precaution For Pregnant Ladies)

ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं घर से बाहर निकलने से बचें।

शांति से काम लें और किसी भी प्रकार का मानसिक या फिर शारीरिक तनाव न लें।

भारत में ग्रहण समय –

शहर का नाम – प्रारम्भ (शाम) – समाप्त (शाम)

ईटानगर – 4:28 से 6:18 तक
गुवाहटी – 4:37 से 6:18 तक
गंगटोक – 4:48 से 6:18 तक
कोलकाता – 4:56 से 6:18 तक
पटना – 5:05 से 6:18 तक
राँची – 5:07 से 6:18 तक
भुवनेश्वर – 5:10 से 6:18 तक
ब्रह्मपुर – 5:15 से 6:18 तक
प्रयागराज – 5:18 से 6:18 तक
लखनऊ – 5:20 से 06:18 तक
कानपुर – 5:23 से 6:18 तक
विशाखापट्टनम – 5:24 से 6:18 तक
रायपुर (छ.ग.) – 5:25 से 6:18 तक
हरिद्वार – 5:26 से 6:18 तक
धर्मशाला – 5:30 से 6:18 तक
चंडीगढ़ – 5:31 से 6:18 तक
नई दिल्ली – 5:32 से 6:18 तक
जम्मू – 5:35 से 6:18 तक
नागपुर – 5:36 से 6:18 तक
भोपाल – 5:40 से 6:18 तक
जयपुर – 5:41 से 6:18 तक
चेन्नई – 5:42 से 6:18 तक
हैदराबाद – 5:44 से 6:18 तक
उज्जैन – 5:47 से 6:18 तक
जोधपुर – 5:53 से 6:18 तक
बेंगलुरु – 5-53 से 6:18 तक
नासिक – 5:55 से 6:18 तक
अहमदाबाद – 6:00 से 6:18 तक
वडोदरा – 05:59 से 06:18 तक
पुणे – 6:01 से 6:18 तक
सूरत – 6:02 से 6:18 तक
तिरुवनन्तपुरम् – 6:02 से 6:18 तक
मुंबई – 6:05 से 6:18 तक
पणजी (गोवा) – 6:06 से 6:18 तक
जामनगर – 6:11 से 6:18 तक

भारत के जिन शहरों के नाम ऊपर सूची में नहीं दिये गये हैं, वहाँ के लिए अपने नजदीकी शहर के ग्रहण का समय देखें ।

विदेशों में ग्रहण समय –

अफगानिस्तान (काबुल) – शाम 4:55 से शाम 5:18 तक

ताईवान (ताईपे) – शाम 5:10 से रात्रि 8:48 तक

पाकिस्तान (इस्लामाबाद) – शाम 5:11 से शाम 5:48 तक

भूटान (थिम्पू) – शाम 5:13 से शाम 6:48 तक

नेपाल (काठमांडू) – शाम 5:16 से शाम 6:33 तक

बांग्लादेश (ढाका) – शाम 5:16 से शाम 6:48 तक

बर्मा (नेपीडॉ) – शाम 5:28 से रात्रि 7:18 तक

हाँगकाँग (हाँगकाँग) – शाम 5:40 से रात्रि 8:48 तक

इंडोनेशिया (जकार्ता) – शाम 5:47 से रात्रि 7:48 तक

थाईलैंड (बैंकॉक) – शाम 5:48 से रात्रि 7:48 तक

श्रीलंका (कोलंबो) – शाम 5:52 से शाम 6:18 तक

सिंगापुर (सिंगापुर) – शाम 6:50 से रात्रि 8:48 तक

ऑस्ट्रेलिया (कैनबरा) – रात्रि 8:10 से रात्रि 11:48 तक

अमेरिका तथा कनाडा के लिए नीचे लिखा गया ग्रहण समय स्थानीय समयानुसार 7 नवम्बर मध्यरात्रि के बाद का है अर्थात 8 नवम्बर 00-00 ए. एम के बाद से ।

अमेरिका (सैनजोस, कैलिफोर्निया) – सुबह 1:10 ए.एम से सुबह 4-48 ए.एम तक

अमेरिका (शिकागो) – सुबह 3:10 से सुबह 6:36 तक

अमेरिका (बोस्टन) – सुबह 4:10 से सुबह 6:28 तक

अमेरिका (न्यूयॉर्क) – सुबह 4:10 से सुबह 6:36 तक

अमेरिका (न्यूजर्सी) – सुबह 4:10 से सुबह 6:36 तक

अमेरिका (वाशिंगटन डी.सी.) – सुबह 4:10 से सुबह 6:45 तक

कनाडा (टोरंटो, ओंटारियो) – सुबह 4:10 से सुबह 7:06 तक

ग्रहण सूतक

चंद्रग्रहण प्रारम्भ होने से तीन प्रहर (9 घंटे) पूर्व सूतक (ग्रहण-वेध) प्रारम्भ हो जाता है ।

उदाहरण
अहमदाबाद में ग्रहण समय – शाम 6:00 से 6:18 तक
अहमदाबाद में सूतक प्रारम्भ – सुबह 9-00 बजे से

ग्रहणकाल का सदुपयोग बचायेगा दुर्गति से, सँवारेगा इहलोक – परलोक – पूज्य बापूजी

जो ग्रहणकाल में उसके नियम पालन कर जप-साधना करते हैं वे न केवल ग्रहण के दुष्प्रभावों से बच जाते हैं बल्कि महान पुण्यलाभ भी प्राप्त करते हैं ।

सूतक (ग्रहण- वेध) के पहले जिन पदार्थों में तिल या सूतक व ग्रहण काल में दूषित नहीं होते । किंतु दूध या दूध से बने व्यंजनों में तिल या तुलसी न डालें। सूतककाल में कुश आदि डला पानी उपयोग में ला सकते हैं ।

ग्रहणकाल में भोजन करने से अधोगति होती है, पेशाब करने से घर में दरिद्रता व सोने से रोग आते हैं तथा संसार-व्यवहार (सम्भोग करने से सूअर की योनि में जाना पड़ता है ।

ग्रहणकाल का कैसे हो सदुपयोग ?

(१) ग्रहण के समय रुद्राक्ष माला धारण करने से पाप नष्ट हो जाते हैं परंतु फैक्ट्रियों में बननेवाले नकली रुद्राक्ष नहीं, असली रुद्राक्ष हों ।

(२) ग्रहण के समय मंत्रदीक्षा में मिले मंत्र जप करने से उसकी सिद्धि हो जाती है ।

(३) महर्षि वेदव्यासजी कहते हैं: ‘चन्द्रग्रहण’ के समय किया हुआ जप लाख गुना फलदायी होता है ।

ग्रहण के समय स्वास्थ्य मंत्र जप लेना, ब्रह्मचर्य का मंत्र भी सिद्ध कर लेना । ग्रहण के समय किये हुए ऐसे-वैसे किसी भी गलत या पाप कर्म का फल अनंत गुना हो जाता है और इस समय भगवद्-चिंतन, भगवद्-ध्यान, भगवद्-ज्ञान का लाभ ले तो वह व्यक्ति सहज में भगवद्-धाम, भगवद्-रस को पाता है । ग्रहण के समय अगर भगवद्-विरह पैदा हो जाता है तो वह भगवान को पाने में बिल्कुल पक्का है, उसने भगवान को पा लिया समझ लो । ग्रहण के समय किया हुआ जप, मौन, ध्यान, प्रभु सुमिरन अनेक गुना हो जाता है । ग्रहण के बाद वस्त्रसहित स्नान करें ।

Standard
Special Day

Budhwari Ashtami (बुधवारी अष्टमी )


बुधवारी अष्टमी

Badhwari Ashtami


On 3rd May, day is Budhwari Ashtami, performing recitation and meditation will bear thousand times more virtues similar to the benefits of performing them during a solar eclipse.

Performing recitation and meditation today (timing 3rd May sunrise to 7.52 pm ) bear thousand times more virtues, similar to the benefits of performing them during a solar eclipse. All Japa, meditation, donations and other good deeds are considered to have supreme benefits. So, we should take advantage of today so that we can earn more virtues with minimal effort.

—- Excerpts from the satsang of Pujya Sant Shri Asharamji Bapu

3-मई बुधवारी अष्टमी (सूर्योदय से रात्रि 7-52 तक)

बुधवारी अष्टमी को किये गए जप, तप, मौन, दान व ध्यान का फल अक्षय होता है ।

इस महा पुण्यशाली दिवस पर सभी साधक भाई-बहन पूज्यश्री के स्वास्थ्य एवं शीघ्र रिहाई के लिए अधिक से अधिक जप-ध्यान व प्रार्थना करें ।

मंत्र जप एवं शुभ संकल्प हेतु विशेष तिथि सोमवती अमावस्या, रविवारी सप्तमी, मंगलवारी चतुर्थी, बुधवारी अष्टमी – ये चार तिथियाँ सूर्यग्रहण के बराबर कही गयी हैं। इनमें किया गया जप-ध्यान, स्नान , दान व श्राद्ध अक्षय होता है।

(शिव पुराण, विद्यश्वर संहिताः अध्याय 10)

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