Satsang

जीवन विकास

sant shri asaramji bapu.

 

हमारे शारीरिक व मानसिक आरोग्य का आधार हमारी जीवनशक्ति है। वह ‘प्राण-शक्ति’ भी कहलाती है । हमारे जीवन जीने के ढंग के मुताबिक हमारी जीवन-शक्ति का ह्रास या विकास होता है। हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों ने योग-दृष्टि से, आंतर-दृष्टि से व जीवन का सूक्ष्म निरीक्षण करके जीवन-शक्ति विषयक गहनतम रहस्य खोज लिये थे । शुद्ध, सात्त्विक, सदाचारी जीवन और विधिवत् योगाभ्यास के द्वारा जीवन-शक्ति का विकास करके कैसी-कैसी रिद्धि-सिद्धियाँ हासिल की जा सकती हैं, आत्मोन्नति के कितने उत्तुंग शिखरों पर पहुँचा जा सकता है इसकी झाँकी महर्षि पतंजलि के योगदर्शन तथा अध्यात्मविद्या के शास्त्रों से मिलती है।

योगविद्या व ब्रह्मविद्या के इन सूक्ष्मतम रहस्यों का लाभ जाने अनजाने में भी आम जनता तक पहुँच जाए इसलिए प्रज्ञावान ऋषि-महर्षियों ने सनातन सत्य की अनुभूति के लिए जीवन-प्रणाली बनाई, विधि निषेध का ज्ञान देने वाले शास्त्र और विभिन्न स्मृतियों की रचना की। मानव यदि ईमानदारी से शास्त्र विहित मार्ग से जीवनयापन करे तो अपने आप उसकी जीवन-शक्ति विकसित होती रहेगी, शक्ति के ह्रास होने के प्रसंगों से बच जायेगा। उसका जीवन उत्तरोत्तर उन्नति के मार्ग पर चलकर अंत में आत्म-विश्रान्ति के पद पर पहुँच जायेगा।

 

प्राचीन काल में मानव का अन्तःकरण शुद्ध था, उसमें परिष्कृत श्रद्धा का निवास था। वह गुरु और शास्त्रों के वचनों के मुताबिक चल पड़ता था आत्मोन्नति के मार्ग पर। आजकल का मानव प्रयोगशील एवं वैज्ञानिक अभिगमवाला हो रहा है। विदेश में कई बुद्धिमान, विद्वान, वैज्ञानिक वीर हमारे ऋषि-महर्षियों के आध्यात्मिक खजाने को प्रयोगशील, नये अभिगम से खोजकर विश्व के समक्ष प्रमाणित कर रहे हैं कि खजाना कितना सत्य और जीवनोपयोगी है ! डॉ. डायमण्ड ने जीवन-शक्ति पर गहन अध्ययन व प्रयोग किये हैं। किन-किन कारणों से जीवन-शक्ति का विकास होता है और कैसे-कैसे उसका ह्रास होता रहता है यह बताया है।

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